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उत्तर प्रदेश चुनाव: भाजपा के सामने पश्चिम में संभलने और पू्रब में पिछली सफलता दोहराने की चुनौती

सार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में कुल 136 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में भाजपा इनमें से केवल 27 पर चुनाव हारी थी। जाटलैंड की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल ने अकेले 277 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल एक सीट जीत पाई थी। इस बार राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। 27 सीटों पर सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद को सफलता मिली थी। लेकिन इस बार अखिलेश इसी बाजी को पलटना चाहते हैं...
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भाजपा रैली - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी के बीच में कभी भी मुलाकात हो सकती है। दोनों नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने दावे को कमजोर नहीं होने देना चाहते। वहां भाजपा की नजर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश काफी अहम है। 2017 में पहला चरण पश्चिम से ही शुरू हुआ था और पूरब तक जाते-जाते भाजपा ने प्रचंड बहुमत पा लिया था। किसान नेता पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि इस बार भाजपा के लिए पश्चिम में पिछली बार से मुकाबला थोड़ा कड़ा नजर आ रहा है। बागपत के डा. सुधीर तोमर को यहां जाट, गूजर, मलिक, सैनी समेत सभी की नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। डा. तोमर कहते हैं कि हालांकि राजनीति का गणित बसपा और कांग्रेस के रूख पर भी निर्भर करेगा।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में कुल 136 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में भाजपा इनमें से केवल 27 पर चुनाव हारी थी। जाटलैंड की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल ने अकेले 277 सीटों पर चुनाव लड़ा और केवल एक सीट जीत पाई थी। इस बार राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। 27 सीटों पर सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद को सफलता मिली थी। लेकिन इस बार अखिलेश इसी बाजी को पलटना चाहते हैं। अखिलेश की निगाह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 136 विधानसभा सीटों में से कम से कम 75 सीटों को जीतने पर टिकी है। इसी रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए वह जयंत चौधरी से मुलाकात करेंगे। ताकि गठबंधन, सीटों के तालमेल, टिकट के बंटवारे और प्रचार को सुव्यवस्थित स्वरूप दिया जा सके।

सपा की हर चाल पर है भाजपा की नजर, दोहराएंगे 2017

भाजपा ने पश्चिम में बढ़त बनाए रखने के लिए काफी बारीकी से काम किया है। पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक प्रमुख नेता का कहना है कि जिन 27 सीटों पर हार मिली थी, इस बार भाजपा उन सभी पर चौंकाएगी। मेरठ, बागपत, बड़ौत, शामली से लेकर हर जिले में भाजपा ने स्थानीय मुद्दे के साथ-साथ मतदाता से जुड़े हितों पर काफी ध्यान दिया है। इसके अलावा मेरठ, सहारनपुर मंडल में भाजपा ने विशेष तैयारी की है। अलीगढ़, मथुरा और आगरा को लेकर भाजपा ने बूथ स्तर के नेताओं के सहारे घर-घर की घंटी बजानी शुरू कर दी है। भाजपा के नेता सुधीर अग्रवाल ने कहा कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन पार्टी 2022 में भी 2017 का इतिहास दोहराएगी।

कांग्रेस देगी टक्कर और बसपा का ध्यान अपने मतदाताओं पर

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की परंपरागत शैली में काफी बदलाव किया है। उन्होंने 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' जैसे कैंपेन के सहारे पूरे उत्तर प्रदेश में चेतना पैदा की है। पार्टी के नेता मनोज त्यागी कहते हैं कि इसका असर पूरे उत्तर प्रदेश में है। खुद उनके मेरठ में भी कांग्रेस मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी। वैसे भी हाथरस, मेरठ, सहारनपुर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पूरे क्षेत्र में प्रियंका गांधी ने कई बार प्रदेश सरकार के लिए मुसीबत खड़ी की है। कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई एक नेता का कहना है कि प्रियंका गांधी की इस पहल का कांग्रेस को लाभ मिलना चाहिए। सूत्र का कहना है कि वह सहारनपुर, मेरठ, मथुरा, अलीगढ़, आगरा होकर लौटी हैं। उन्हें लग रहा है कि कांग्रेस को कई सीटों पर सफलता मिलेगी।

बसपा के 'ब्राह्मण भाईचारा बनाओ समिति' के कोऑर्डिनेटर का कहना है कि चुनाव मतदान की तारीख नजदीक आने दीजिए। हमारे पास भाजपा, सपा, कांग्रेस की तरह शोर मचाने के संसाधन नहीं हैं। हमारी पार्टी के नेता जमीन पर और लोगों के बीच में काम करते हैं। हमारा सर्व समाज का कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी को निभा रहा है। सुनील गौतम का कहना है कि भाजपा से किसान, मुसलमान, ओबीसी नाराज हैं। समाजवादी पार्टी का इतिहास उसका पीछा नहीं छोड़ रहा है। जबकि कांग्रेस की राजनीतिक जड़ें सूख चुकी हैं। ऐसे में एक बार फिर जनता बसपा को अजमाने के बारे  में सोच रही है।

अभी सभी दल टिकट बंटवारे को लेकर संवेदनशील

उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने संगठन मंत्री सुनील बंसल के साथ पहले चरण के उम्मीदवारों के चयन का काम करीब-करीब पूरा कर लिया है। पहले चरण की अधिसूचना 14 जनवरी को जारी होगी और समझा जा रहा है कि 15 या 16 जनवरी को भाजपा अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करेगी। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों में शामिल सूत्र का कहना है कि जल्द ही समाजवादी पार्टी भी इसे अंतिम रूप दे देगी। समाजवादी पार्टी भी अपने उम्मीदवारों की सूची मकरसंक्रांति के बाद जारी करने की तैयारी कर रही है। सुनील गौतम के मुताबिक बसपा काफी पहले से उम्मीदवारों को लेकर होमवर्क पूरा कर लेती है। बसपा को बस सूची जारी करनी है। कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए नई दिल्ली में केंद्रीय और उत्तर प्रदेश में दो चुनाव वॉर रूम बनाया है। केंद्रीय वॉर रूम से पांच राज्यों के चुनाव रणनीतियों की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जबकि लखनऊ में प्रदेश पार्टी कार्यालय और युवा प्रदेश कार्यालय से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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