भाजपा को मुख्यमंत्री योगी मंत्रिमंडल के सहयोगी स्वामी प्रसाद मौर्य और उनके बाद तीन विधायकों ने अचानक ही भाजपा का साथ नहीं छोड़ा है। यह कवायद डेढ़ साल से चल रही थी और अगस्त 2021 में ही इसकी पटकथा लिखी जा चुकी थी। समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि उनके साथ 40 फीसदी मौर्य, 50 फीसदी पटेल, कुशवाहा, वर्मा, राजभर, सैनी, शाक्य का पूरा कुनबा आ रहा है। थोड़ा समय और लगेगा। अखिलेश यादव के एक प्रमुख रणनीतिकार की मानें तो उनके सूत्र भाजपा की विधायक मंडली में भीतर तक घुसे हुए हैं। यह कोशिश भी भाजपा विधायकों के संपर्क करने के प्रयास के बाद शुरू हुई थी।
समाजवादी पार्टी के एक नेता ने भाजपा को अपनी पार्टी बचाने की नसीहत दी है। भाजपा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को उत्तर प्रदेश भाजपा में भगदड़ रोकने की कमान सौंपी है। उत्तर प्रदेश में इस जिम्मेदारी को भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और संगठन मंत्री सुनील बंसल संभालेंगे। पार्टी के नेताओं को समझाने, बुझाने, मनाने का प्रयास होगा। मीडिया में एक खबर और चल रही है कि जल्द ही भाजपा भी समाजवादी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराएगी। इस खबर की प्रतिक्रिया में सूत्र का कहना है कि भाजपा से कहिए, पहले अपनी पार्टी के नेताओं को संभाल लें। कई तो आने के लिए तैयार बैठे हैं। कई नेता संपर्क में हैं और 15 जनवरी के बाद सबको पता चल जाएगा। सूत्र का कहना है कि तोड़-फोड़ की राजनीति में भाजपा को नुकसान ही होगा।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख सूत्र ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष लोगों को शामिल कराने के मामले में काफी संवेदनशीलता, सावधानी और गंभीरता बरत रहे हैं। हमारे पास अपने पार्टी कार्यकर्ता, नेता हैं और उनका भी स्थान, सम्मान किया जा रहा है। सूत्र का कहना है कि समाजवादी पार्टी के नेताओं से भाजपा के नेता खुद संपर्क कर रहे हैं। कुछ नेता ओमप्रकाश राजभर के संपर्क में हैं तो कुछ जयंत चौधरी के भी संपर्क में हैं और समाजवादी पार्टी में शामिल होकर हमारे टिकट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने इधर योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और उधर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलने चले गए। सूत्र का कहना है कि सब अचानक तो हुआ नहीं है। तीन विधायकों ने भी भाजपा छोड़ी है। बताते हैं कि भाजपा के कुछ नेताओं को पहले से इसका अनुमान था। बताते हैं कि जून 2021 में भाजपा के बड़ी संख्या में नेताओं, विधायकों ने उत्तर प्रदेश के मौजूदा नेतृत्व के विरोध में अपनी राय दी थी। वह हमसे भी भेंट के दौरान बताते थे कि उनके यहां सब ठीक नहीं है। समाजवादी पार्टी के संजय लाठर तो यहां तक कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी के राज-काज से भाजपा के मंत्रियों, विधायकों में पहले से ही काफी नाराजगी थी। भाजपा अपने नेताओं का सम्मान नहीं कर पाई। जमीन पर भी जनता के हितकारी काम नहीं हुए। केवल घोषणाएं होती रही और नेताओं का भाजपा से मोह भंग होना उसी का नतीजा है।