दूसरी खबर चाचा शिवपाल सिंह यादव को लेकर है। अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को उनके जन्मदिन पर चचा को सम्मान देने का वादा कर लिया है। बताया जा रहा है कि चाचा के पास भी कोई दूसरा बड़ा चारा नहीं है। इसलिए वह भी भतीजे के साथ समाजवादी पार्टी को मजबूत बनाने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना आ रही है कि शिवपाल अपने छह-सात पसंद के उम्मीदवार उतार सकते हैं।
सोनिया गांधी ने ले ली राहत की सांस!
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के बाद राहत की सांस ले ली है। राजस्थान के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और युवा नेता सचिन पायलट भी करीब-करीब खुश हैं। पायलट पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही दिल्ली से जयपुर के लिए रवाना हुए थे। बताते हैं रविवार सुबह तक अशोक गहलोत ने अपने जादूगरी अंदाज से थोड़ा बाजी पलटनी चाही, लेकिन राजस्थान के प्रभारी अजय माकन समेत कुछ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष की सलाह को ही सर्वोपरि रखा। अब बारी सचिन पायलट की ताजपोशी की है। सुनने में आ रहा है कि जल्द ही वह भी राजस्थान में पार्टी की कमान थाम लेंगे। इस तरह से राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के पहले राज्य में सबकुछ ठीकठाक चलने की उम्मीद बढ़ गई है।
राजस्थान के साथ-साथ पंजाब से भी कांग्रेस अध्यक्ष के पास अच्छी खबर आ रही है। मुख्यमंत्री चन्नी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। वह 2022 में विधानसभा चुनाव को देखकर फैसले ले रहे हैं। थोड़ी-बहुत चिंता केवल पंजाब कांग्रेस के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की राजनीतिक शैली को लेकर है।
उत्तर प्रदेश चुनाव के अंत में तगड़ी इंट्री लेंगे प्रधानमंत्री मोदी!
जुलाई में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे और नेतृत्व में लड़े जाने का भाजपा ने मन बनाया था, लेकिन मंथन के बाद भाजपा ने कई अहम बदलाव किए हैं। बताते हैं यह बदलाव अगस्त, सितंबर और अक्तूबर के तीन महीनों में जनता का रुख देखने के बाद हुआ है। अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़े जाने की योजना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब साथ में मंच साझा करेंगे। इस रणनीति को आगे करने के लिए भाजपा ने चुनाव प्रचार की रणनीति में केंद्रीय नेताओं की भागीदारी भी बढ़ा दी है। सूत्र तो यह भी कहते हैं कि तीन दिन तक उत्तर प्रदेश को लगातार समय देकर दिल्ली लौटे प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाबत व्यापक समय देने के लिए हामी भर दी है। इसका एक अर्थ यह भी लगाया जा रहा है कि 2022 में चुनाव के बाद की स्थिति पर भी कई फैसले हो सकते हैं।