प्रियंका गांधी के साथ दीपेंद्र हुड्डा
- फोटो : Deepender S Hooda/Twitter
उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एक नया प्रयोग करने जा रही है। इस प्रयोग में उत्तर प्रदेश को प्रयोगशाला बनाया जाएगा और नेताओं की नई खेप तैयार की जाएगी। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अगले 10 से 15 सालों को ध्यान में रखकर इन नेताओं को तैयार किया जा रहा है। ताकि अलग-अलग राज्यों में इन्हें सबसे प्रमुख भूमिका में रखकर सरकार बनने पर मुख्यमंत्री जैसे नए दायित्व भी दिए जा सकें।
उत्तर प्रदेश: राजनीति की प्रयोगशाला
उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियान में अगर कांग्रेस की गतिविधियों पर नजर डालें तो पाएंगे कि प्रियंका गांधी और उत्तर प्रदेश के नेताओं के अलावा बाहरी प्रदेश के अगर किसी युवा नेता को सबसे आगे रखा जा रहा है, तो वह हरियाणा के युवा नेता दीपेंद्र हुड्डा हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि हरियाणा में जिस तरीके से कांग्रेस की राजनीति चल रही है, उसमें किसी युवा नेता को ही पार्टी आगे बढ़ाना चाहती है और सरकार बनने पर बतौर मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की दावेदारी भी कर सकती है। इसी दिशा में प्रियंका गांधी और उनकी टीम ने दीपेंद्र सिंह हुड्डा पर दांव लगाकर उत्तर प्रदेश के राजनीति की प्रयोगशाला में शामिल किया और उन्हें उत्तर प्रदेश चुनाव में नई जिम्मेदारियां भी दी जा रही हैं।
युवा फूंकेंगे पार्टी में नई जान
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने तय किया है कि इस बार ऐसे ही कई नेताओं को आगे लाया जाएगा ताकि उन्हें उनके राज्य में बड़े चेहरे के तौर पर सामने रखा जा सके। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश की जो अलग-अलग चुनाव से जुड़ी हुई कमेटियां गठित की हैं उनमें युवा नेताओं को भी शामिल किया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि दरअसल पार्टी में किसी बात को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है कि युवाओं को आगे रखा जाए या वरिष्ठ को। कुछ वरिष्ठ नेताओं का मत है कि युवाओं को आगे रखकर पार्टी में नई जान फूंकी जा सकती है। जिस तरीके से प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में आक्रामक रूप से सक्रिय हैं उससे युवाओं में मनोबल बढ़ रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता का कहना है कि उन्होंने आलाकमान को भी इस बात के लिए कहा है कि युवाओं को आगे लाकर उत्तर प्रदेश के चुनाव में जिम्मेदारियां दी जाएं ताकि उन्हें अपने प्रदेश में बेहतर तरीके से स्वीकार किया जा सके।
दूसरे राज्यों में भी यही प्रयोग
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों में पार्टी ने अपने उन राज्यों से ऐसे युवा नेताओं को सामने लाने की सूची तैयार की है, जहां पर अभी कांग्रेस की सत्ता नहीं है। इसमें मध्यप्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र समेत कुछ दक्षिण भारत के युवा कांग्रेस के नेता भी शामिल हैं। यह वे नेता हैं जो अगले 10 से 15 सालों के भीतर अपने राज्यों में बड़े चेहरे के तौर पर बड़ी जिम्मेदारियों के साथ सामने लाए जाएंगे।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी अगर अपनी इस रणनीति को हकीकत में अमल में ले आती है कि युवाओं पर ज्यादा से ज्यादा दांव लगाया जाएगा, तो आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस की पूरी तस्वीर बदल सकती है। वे कहते हैं कि कांग्रेस में अभी भी संकट इसी बात का बना रहता है कि दांव युवाओं पर लगाया जाए या बुजुर्ग हो चुके नेताओं पर। यही वजह है कि कांग्रेस पार्टी में हमेशा अंदरूनी तौर पर एक कलह मची रहती है। वे कहते हैं कि जिस तरीके से प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में अपनी एक अलग छवि के साथ प्रचार-प्रसार कर रही हैं, उसका असर उत्तर प्रदेश के चुनावों में कितना दिखेगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन निश्चित तौर पर जिन राज्यों में अभी चुनावों में वक्त है वहां पर प्रियंका गांधी की युवा और आक्रामक छवि का फायदा उठाया जा सकता है।