हालांकि, इसी बीच बुंदेलखंड क्षेत्र की महोबा सीट की चर्चा जोरों पर हैं। दरअसल, बुंदेलखंड भाजपा के कार्यकर्ता इस सीट को लकी सीट मानते हैं। अमर उजाला से कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने 2017 के चुनावों में यहीं से अपने चुनावी अभियान को धार दी थी। इसके बाद पार्टी सत्ता की दहलीज तक पहुंच सकी थी। चुनाव से पहले 19 नवंबर 2021 को भी पीएम मोदी और योगी यहां पहुंचे थे। यहां से उन्होंने क्षेत्र के लिए 34 करोड़ जल परियोजना की सौगात दी थी। इसके बाद ही भाजपा ने पूरे प्रदेश में अपने प्रचार अभियान का शंखनाद किया था।
कभी इस क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था, लेकिन 1984 के बाद बुंदेलखंड में कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती चली गई। इसकी जगह सपा-बसपा और भाजपा ने ली। 2014 में बीजेपी ने बुंदेलखंड में पैर जमाने शुरु किए। इसके बाद कोई उसे उखाड़ नहीं सका। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बुंदेलखंड की सभी 19 विधानसभा सीटों को जीत हासिल कर रिकॉर्ड बनाया। 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश और मायावती के गठबंधन का भी बुंदेलखंड में भाजपा के विजय रथ को नहीं रोक सका था। यहां पार्टी ने सभी पांच सीटों पर जीत हासिल की थी।
भाजपा ने ऐसे मजबूत किया बुंदेलखंड का किला
पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में ओबीसी और दलित मतदाता सबसे अहम है। यहां करीब 22 फीसदी सामान्य वर्ग के वोट हैं। इनमे ब्राह्मण, ठाकुरों और वैश्य समाज की की संख्या अच्छी खासी संख्या है। इसके बाद करीब 43 फीसदी ओबीसी वोटर हैं। इनमें निषाद, कुर्मी, कुशवाह जैसी अहम जातियां शामिल है। वहीं 26 प्रतिशत दलित वोट हैं। इनमें जाटव की संख्या सबसे अधिक है।
इन्हीं जातीय समीकरण के चलते कभी यह क्षेत्र बहुजन समाज पार्टी का गढ़ हुआ करता था, लेकिन मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी, ओबीसी चेहरा बाबू सिंह कुशवाहा और दलित नेता दद्दू प्रसाद के बाद ब्राह्मण नेताओं साथ छोड़ने के बाद से बसपा यहां पर कमजोर होती चली गई। एक समय समाजवादी पार्टी ने यहां मुस्लिम, ओबीसी, दलित और ब्राह्मणों को साधकर अपनी साख जमाई थी, लेकिन भाजपा ने ओबीसी, ठाकुर, ब्राह्मण और दलित वोटों को अपने साथ जोड़कर अपनी जगह मजबूत कर ली है।
विकास को मिली रफ्तार लेकिन पलायन बड़ी समस्या
यूपी में मोदी-योगी सरकार के आने के बाद बुंदेलखंड में विकास को रफ्तार मिली। बुंदेलखंड के विकास के लिए बीजेपी सरकार ने बोर्ड का गठन भी किया है। इसके अलावा क्षेत्र के विकास में तेजी से आ सके इसके लिए कई अहम योजनाएं भी शुरु की है। झांसी से चित्रकूट के क्षेत्र को डिफेंस कॉरिडोर घोषित किया है। इटावा से चित्रकूट तक बन रहे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के जरिए विकास की सौगात मिली है। महोबा अर्जुन सहायक परियोजना से बुंदेलखंड के किसानों को पानी की किल्लत से निजात मिल सकती है।
हालांकि, इस चुनाव में भी बुंदेलखंड में सूखा, बेरोजगारी, पलायन और किसानों की आत्महत्या अहम मुद्दा बनी हुई है। अमर उजाला से चर्चा में महोबा के लोगों का कहना है कि आज क्षेत्र में आवारा पशु बढ़ी समस्या है। आवारा पशु सभी फसल बर्बाद कर देते है। इस तरफ कोई भी जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि आज भी क्षेत्र में किसानों की आत्महत्या बढ़ रही है। वहीं पानी की किल्लत जस की तस है। आज भी लोगों के घर पानी नहीं आ रहा है। पास के शहरों से टैंकर के जरिए गांवों में पानी सप्लाई किया जाता है।
इन सीटों पर होना है तीसरे चरण में चुनाव
बुंदेलखंड का इलाका सियासी रूप से काफी अहम है जो उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैला हुआ है। इसमें यूपी के सात और एमपी के छह जिले आते हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, बांदा, महोबा और कर्बी (चित्रकूट) जिले की 19 विधानसभा सीटें हैं। तीसरे चरण में झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर और महोबा जिले की 13 सीटों पर चुनाव हैं तो चौथे चरण में बांदा जिले की 4 सीटें और पांचवें चरण में चित्रकूट जिले की 2 सीटों पर चुनाव होने है।