UP Assembly Election 2022: यूपी चुनाव तक लखीमपुर खीरी हिंसा कांड की रहेगी गूंज, सियासी गरमी बनाए रखने की कोशिश करेगा विपक्ष
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 15 Dec 2021 02:07 PM IST
सार
इस मुद्दे पर विपक्ष ने आक्रमक रुख का संकेत दिया है। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हंगामा मचा है और माना जा रहा है कि यूपी चुनाव तक विपक्ष बार-बार यह मुद्दा उठाएगा।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
- फोटो : ANI
लखीमपुर खीरी हिंसा केस में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने खुलासा किया कि किसानों को मारने के मकसद से ही उन पर गाड़ी चढ़ाई गई थी। वह एक सोची-समझी साजिश थी ना कि हादसा। इस मामले में गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं और उनकी जमानत अर्जी पर छह जनवरी को सुनवाई होनी है। एसआईटी के इस खुलासे के बाद संसद से लेकर यूपी विधानसभा तक हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस और सपा ने इसे मुद्दा बना लिया है और इसे लेकर दिल्ली से लखनऊ तक विपक्षी दल गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का इस्तीफा मांग रहे हैं।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में बुधवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय टेनी की बर्खास्तगी की मांग की। इसे लेकर ससंद में खूब शोर-शराबा हुआ। दूसरी तरफ सपा अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। वहीं टीएमसी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। कुल मिलाकर पूरे विपक्ष ने इस मामले में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। यह सब तब हो रहा है जब पीएम मोदी और 12 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री यूपी में हैं और सिर्फ 2022 विधानसभा चुनाव नहीं बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव भी जीतने की रणनीति बनाई जा रही है।
एसआईटी रिपोर्ट ने विपक्ष को थमाया बड़ा मुद्दा
माना जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक बार फिर बड़ा मुद्दा थमा दिया है। तीनों कृषि कानून रद्द होने और किसानों की घर वापसी के बाद भाजपा प्रदेश में सियासी माहौल बदलने की उम्मीद कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट, सरयू नहर परियोजना और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे विकास और आध्यात्मिक परियोजनाओं के जरिए भाजपा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, लेकिन लखीमपुर खीरी कांड में एसआईटी की इस रिपोर्ट ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दिया है। वहीं किसान संगठनों ने भी अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर दी है। जानकार मानते हैं कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष यूपी में सियासी गरमी बनाए रखने की कोशिश करेगा।
राहुल गांधी का सरकार पर हमला
- फोटो : ANI
लखीमपुर खीरी हिंसा केस में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने खुलासा किया कि किसानों को मारने के मकसद से ही उन पर गाड़ी चढ़ाई गई थी। वह एक सोची-समझी साजिश थी ना कि हादसा। इस मामले में गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी हैं और उनकी जमानत अर्जी पर छह जनवरी को सुनवाई होनी है। एसआईटी के इस खुलासे के बाद संसद से लेकर यूपी विधानसभा तक हंगामा मचा हुआ है। कांग्रेस और सपा ने इसे मुद्दा बना लिया है और इसे लेकर दिल्ली से लखनऊ तक विपक्षी दल गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का इस्तीफा मांग रहे हैं।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में बुधवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय टेनी की बर्खास्तगी की मांग की। इसे लेकर ससंद में खूब शोर-शराबा हुआ। दूसरी तरफ सपा अध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग की। वहीं टीएमसी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। कुल मिलाकर पूरे विपक्ष ने इस मामले में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। यह सब तब हो रहा है जब पीएम मोदी और 12 भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री यूपी में हैं और सिर्फ 2022 विधानसभा चुनाव नहीं बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव भी जीतने की रणनीति बनाई जा रही है।
एसआईटी रिपोर्ट ने विपक्ष को थमाया बड़ा मुद्दा
माना जा रहा है कि एसआईटी की रिपोर्ट ने विपक्ष को सरकार के खिलाफ एक बार फिर बड़ा मुद्दा थमा दिया है। तीनों कृषि कानून रद्द होने और किसानों की घर वापसी के बाद भाजपा प्रदेश में सियासी माहौल बदलने की उम्मीद कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट, सरयू नहर परियोजना और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे विकास और आध्यात्मिक परियोजनाओं के जरिए भाजपा सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, लेकिन लखीमपुर खीरी कांड में एसआईटी की इस रिपोर्ट ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमलावर होने का बड़ा मौका दिया है। वहीं किसान संगठनों ने भी अजय मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर दी है। जानकार मानते हैं कि इस मुद्दे को लेकर विपक्ष यूपी में सियासी गरमी बनाए रखने की कोशिश करेगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा
- फोटो : फाइल फोटो
भाजपा और सरकार के लिए असहज स्थिति
यूपी की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार राम दत्त त्रिपाठी कहते हैं ‘यह मामला सत्ता के घमंड और अहंकार का था। अब केस तकनीकी रूप से आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे जांच में सबूत मिलते जा रहे हैं अब यह साबित हो रहा है कि किसानों पर जान-बूझ कर गाड़ी चलाई गई। गृह राज्य मंत्री की बात झूठी साबित हो रही है कि घटनास्थल पर उनका बेटा नहीं था। जाहिर है इससे जहां सरकार और भाजपा के लिए बेहद असहज स्थिति पैदा हुई है वहीं विपक्ष को इस मुद्दे को गरमाए रखने का मौका मिला है। देखना है कि अब सरकार इस पर कैसी प्रतिक्रिया देती है’।
अजय मिश्रा के इस्तीफे पर सवाल
यूपी के एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद और अब किसान आंदोलन स्थगित होने के बाद कुछ हद तक यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था लेकिन एसआईटी की रिपोर्ट ने फिर इस मामले को गरमा दिया है। विपक्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लखीमपुर खीरी मुद्दे का फायदा उठाने की कोशिश करेगा। भाजपा जहां एक तरफ विकास और हिंदुत्व के एजेंडे के रथ पर सवार हैं वहीं, विपक्षी एसआईटी की रिपोर्ट और लखीमपुर खीरी कांड को ही मुख्य मुद्दा बना सकता है। चूंकि चुनाव में अब महज कुछ दिन शेष बचे हैं इसलिए विपक्ष के लिए इस मुद्दे को गरमाए रखना आसान होगा। ऐसे में भाजपा के सामने एक बड़ी मुश्किल जरूर खड़ी है कि वो अजय मिश्रा का इस्तीफा ले या नहीं?
पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ
- फोटो : PTI
भाजपा के लिए मुश्किल क्या? ब्राह्मण वोट बैंक के लिए अजय मिश्रा जरूरी
लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे हैं जो लखीमपुर खीरी से सांसद हैं। माना जा रहा है कि इस साल जुलाई में जब अजय मिश्रा को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया, तो उन्हें उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के प्रतिनिधित्व के रूप में देखा गया। ब्राह्मणों तक पहुंचने के लिए भाजपा जितिन प्रसाद को भी पार्टी में लेकर आई। यह सब उस धारणा के तहत किया गया जिसमें कहा गया कि यूपी में ब्राह्मण भाजपा से दूर जा रहे थे।
गृहराज्य मंत्री का इस्तीफा कब?
वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी कहते हैं कि मेरा अनुमान है कि अजय मिश्रा का इस्तीफा तुंरत नहीं होगा। पहले भाजपा यह देखेगी कि यह मांग कितनी जोर पकड़ता है। लेकिन यदि तीनों कृषि कानून वापस लिया जा सकते हैं, तो अजय मिश्रा का इस्तीफा भी लिया जा सकता है।
आशीष मिश्रा और अजय मिश्रा टेनी
- फोटो : Amar Ujala
चुनावों पर पड़ेगा असर?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लखीमपुर खीरी हिंसा का मामला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भले ही न्यायिक निष्कर्ष पर न पहुंचे लेकिन इसका असर चुनावों पर पड़ सकता है। कांग्रेस इस मामले में अधिकतम राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश कर रही है। घटना के वक्त कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर बढ़त लेकर सबका ध्यान खींचा था और पार्टी की योजना हर दिन इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की है।
चुनावी सर्वेक्षण में नुकसान होने की बात
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अजय मिश्रा के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर अब गांव-गांव में जाएगी और लोगों को पर्चे और चर्चाओं के जरिए लोगों को एसआईटी रिपोर्ट के बारे में बताएगी। ऐसे में भाजपा और सीएम योगी के लिए लखीमपुर खीरी हिंसा और गृह राज्य मंत्री के बेटे की संलिप्तता एक चुनौती की तरह है। हाल में हुए एक चुनावी सर्वेक्षण में कहा गया कि तीन अक्तूबर को हुए लखीमपुर खीरी हिंसा जिसमें नौ लोगों की जान गई थी, इस वजह से भाजपा को चुनावों में नुकसान पहुंच सकता है। सर्वे के मुताबिक 62 फीसदी मतदाताओं को लगता है कि इस मुद्दे से विधानसभा चुनाव में भगवा पार्टी को नुकसान होगा, जबकि सिर्फ 21.5 फीसदी को लगता है कि इससे भाजपा को मदद मिलेगी। वहीं कुल 16 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।