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छापेमारी पर सियासत भारी: सपा नेताओं के ठिकानों पर छापेमारी के मायने क्या हैं? क्या इससे अखिलेश की मुश्किलें बढ़ेंगी?

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 31 Dec 2021 04:42 PM IST

सार

पुष्पराज जैन का नाम हाल ही में तब सामने आया जब जीएसटी अधिकारियों ने एक अन्य इत्र डीलर पीयूष जैन के परिसरों पर छापेमारी की। जहां 190 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी बरामद हुई।
 
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पुष्पराज जैन - फोटो : अमर उजाला
कानपुर और कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां से मिली 190 करोड़ से ज्यादा की नकदी के बाद आयकर विभाग ने शुक्रवार को कन्नौज में फिर से छापेमारी की। इस बार आयकर विभाग की टीम के निशाने पर आए समाजवादी पार्टी के एमएलसी व इत्र कारोबारी पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी। आईटी की टीम ने पुष्पराज के चिपट्टी और मोहम्मद याकूब के आवास व कारखानों पर छापा मारा है। सपा नेताओं के यहां हुए इस छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई। इससे पहले आयकर विभाग ने 18 दिसंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी और पार्टी पदाधिकारी राजीव राय और लखनऊ में जैनेंद्र यादव उर्फ नीटू के परिसरों पर भी छापेमारी की थी। 

पुष्पराज जैन के यहां छापे के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौज में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और यूपी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वे पहले से ही जानते थे कि समाजवादियों के यहां छापे पड़ेंगे। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा नफरत की दुर्गंध फैलाने वाले सौहार्द की सुगंध कैसे पसंद करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सपा नेताओं को डराने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। इससे पहले भी वे कह चुके हैं कि जब-जब भाजपा को हारने का डर होता है सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद एक के बाद एक कई भाजपा नेताओं ने अखिलेश के खिलाफ बयान देने शुरू कर दिए।
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पुष्पराज जैन - फोटो : अमर उजाला
कानपुर और कन्नौज में इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां से मिली 190 करोड़ से ज्यादा की नकदी के बाद आयकर विभाग ने शुक्रवार को कन्नौज में फिर से छापेमारी की। इस बार आयकर विभाग की टीम के निशाने पर आए समाजवादी पार्टी के एमएलसी व इत्र कारोबारी पुष्पराज जैन उर्फ पम्पी। आईटी की टीम ने पुष्पराज के चिपट्टी और मोहम्मद याकूब के आवास व कारखानों पर छापा मारा है। सपा नेताओं के यहां हुए इस छापेमारी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई। इससे पहले आयकर विभाग ने 18 दिसंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी और पार्टी पदाधिकारी राजीव राय और लखनऊ में जैनेंद्र यादव उर्फ नीटू के परिसरों पर भी छापेमारी की थी। 

पुष्पराज जैन के यहां छापे के बाद अखिलेश यादव ने कन्नौज में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और यूपी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वे पहले से ही जानते थे कि समाजवादियों के यहां छापे पड़ेंगे। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा नफरत की दुर्गंध फैलाने वाले सौहार्द की सुगंध कैसे पसंद करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सपा नेताओं को डराने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। इससे पहले भी वे कह चुके हैं कि जब-जब भाजपा को हारने का डर होता है सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद एक के बाद एक कई भाजपा नेताओं ने अखिलेश के खिलाफ बयान देने शुरू कर दिए।

कारोबारी पुष्पराज जैन - फोटो : अमर उजाला
सपा नेताओं के यहां छापे अखिलेश को कमजोर करने के लिए? 
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आयकर के छापों से समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। सपा नेताओं का आरोप है कि यह सब चुनाव में अखिलेश यादव को कमजोर करने और पार्टी की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कानपुर में जिस इत्र कारोबारी पीयूष जैन के यहां आयकर विभाग ने पिछले हफ्ते छापा मारा था, उनके पास चुनाव में खर्च होने वाला बड़ा फंड रखा हुआ है। इसी सूचना के बाद आयकर विभाग ने रेड डालकर अभूतपूर्व नगदी बरामद की। ऐसे में कहा जा रहा है कि यदि यह पैसा चुनाव में इस्तेमाल के लिए पीयूष जैन ने अपने पास रखा था तो आयकर विभाग ने छापा मारकर सपा के चुनाव अभियान को कड़ी चोट पहुंचाई है। हालांकि अखिलेश यादव ने पीयूष जैन के साथ सपा के रिश्ते से इनकार किया है।



उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि छापे की टाइमिंग पर सवाल तो है। निश्चित तौर पर चुनाव से ठीक पहले सपा नेताओं के यहां पड़ने वाले छापे सपा को चुनाव में कमजोर करने के लिए है और हो सकता है कि यदि अगली बार भाजपा सरकार फिर आ जाए तो अपने करीबियों के यहां मिली नगदी के आधार पर अखिलेश यादव भी मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंस सकते हैं। वे कहते हैं कि इस तरह के छापों से पार्टी का मनोबल आसानी से गिराया जा सकता है क्योंकि अवैध पैसा मिलना गैरकानूनी है। गैरकानूनी काम के बारे में कोई भी पार्टी खुलकर कुछ भी बोलने का जोखिम नहीं उठाएगी। 

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्नौज में जनसभा को संबोधित किया। - फोटो : अमर उजाला
क्या अखिलेश चुनाव में वाकई भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं?
अखिलेश यादव प्रदेश में विजय यात्रा निकाल रहे हैं और उनकी रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है। सपा नेता कहते हैं उत्साही भीड़ उन्हें और ऊर्जावान बना रही है, इसलिए भाजपा घबरा गई है। कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। विधानसभा चुनाव की सियासी लड़ाई में सपा और भाजपा के बीच द्विध्रुवीय मुकाबला बनने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि इसलिए उनकी चुनावी लड़ाई कठिन बनाई जा रही है। भाजपा और सपा दोनों ने छोटी जाति-आधारित पार्टियों के साथ गठबंधन किया है और दोनों एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में हैं। 

कई सर्वे में भाजपा की सपा से टक्कर
एबीपी न्यूज और सी वोटर के सर्वे में कहा गया कि यूपी में फिर भाजपा की सरकार बन सकती है लेकिन भाजपा का सपा से तगड़ा मुकाबला है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा को जहां 212-224 सीटें मिलने का अनुमान है वहीं, सपा को 151-163 सीटें मिलने की संभावना है। अगर बसपा की बात करें तो यहां 12-24 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस 2-10 सीटें जीत सकती है। यही वजह है कि भाजपा नेता और केंद्रीय नेतृत्व सीधे-सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर ले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह, योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य तक सभी भाजपा नेताओं के खास निशाने पर अखिलेश यादव हैं। 

गोरखपुर में पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला।
पीएम की रैली से निकला साफ संकेत
इसी महीने गोरखपुर में ही रैली में समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह साफ संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश में 2022 की महत्वपूर्ण चुनावी लड़ाई में सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होने वाली है। मोदी ने बार-बार लोगों से ‘लाल टोपी; से सतर्क रहने की अपील की, जो आमतौर पर सपा नेता पहनते हैं। अखिलेश यादव अक्सर लाल टोपी में ही नजर आते हैं। मोदी ने कहा, ‘रेड कैप रेड अलर्ट है’ और इससे सावधान रहें। पीएम के इस बयान के कुछ ही देर बाद अखिलेश ने उनके बयान पर पलटवार किया और कहा कि लाल टोपी वाले लोग भाजपा के लिए रेड अलर्ट हैं। उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अकेला ऐसा दल है जो भाजपा को हरा सकता है।

मायावती-प्रियंका पर नहीं सीधा निशाना
‘बुआ-बबुआ’ (मायवती-अखिलेश) का नाम लेकर बेशक पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह रैलियों में बयान दे रहे हैं लेकिन सीधे तौर पर मायावती उनके निशाने पर नहीं है। दूसरी तरफ पार्टी कांग्रेस को इस रेस में ही नहीं मानती इसलिए प्रियंका गांधी पर भी कोई हमला नहीं बोलती। जबकि मायावती और प्रियंका गांधी भी इस चुनाव में अपना जोर लगा रही हैं। 

कानपुर मेट्रो में सफर करते पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : Agency
सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के निदेशक संजय कुमार के मुताबिक एक तरफ समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दल हैं और दूसरी तरफ भाजपा और उनकी सहयोगी दल। अगर अभी की स्थिति का आकलन किया जाए तो लगता है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल चार कदम आगे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी भाजपा को कड़ी टक्कर दे रही है।

भाजपा का ग्राफ बढ़ रहा
एबीपी सी-वोटर के ताजा सर्वे में यूपी में भाजपा का ग्राफ फिर बढ़ रहा है। सर्वे में 49 फीसदी लोगों ने भाजपा के दोबारा सत्ता में लौटने की बात कही है। वहीं, 30 फीसदी लोगों ने सपा की सरकार बनने की बात कही।  
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