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Up Election 2022: जनवरी में लागू हो सकती है आचार संहिता, क्या इस वजह से पीएम मोदी कर रहे ताबड़तोड़ दौरे?

सार

चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी इसी महीने अभी चार बार उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी के अन्य नेता भी बनारस और राज्य के अलग अलग जिलों में पहुंचेंगे। 
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वाराणसी में पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में कोई कोर कसर बाकी ना रहे इसके लिए भारतीय जनता पार्टी की चुनाव समिति की कोर कमेटी पूरी तैयारियों में जुटी हुई है। अनुमान तो यही है कि जनवरी के पहले सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना जारी हो जाएगी और  तमाम चुनावी बंदिशें उसी के साथ लग जाएंगी। यही वजह है कि अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ दौरे और कार्यक्रमों को लगाया जा रहा है। ताकि चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले उत्तर प्रदेश की जनता को तमाम सौगाते दी जा सके। अभी दिसंबर को खत्म होने में 15 दिन बाकी हैं और प्रधानमंत्री के चार दौरे और तय हो चुके हैं। सिर्फ यही नहीं भारतीय जनता पार्टी के दक्षिण भारत के सांसदों का दौरा भी काशी और अयोध्या के लिए तय कर दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी आस्था और डेवलपमेंट को साथ साथ लेकर चुनावी अभियान में चल रही है। दो दिन पहले जिस तरीके से आस्था का कुंभ "काशी विश्वनाथ कॉरिडोर" के उद्घाटन के दौरान लगा अब उसी पैटर्न पर विकास की योजनाओं को सिरे चढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के फिर से ताबड़तोड़ दौरे पर आने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनावी कोर कमेटी के वरिष्ठ सदस्यों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले 15 दिन में उत्तर प्रदेश में 4 दौरे तय किये गए हैं। इसमें 18 दिसंबर को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस वे का उद्घाटन भी शामिल है। जो शाहजहांपुर के जलालाबाद इलाके में होगा। एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक को जोड़ेगा। इस कार्यक्रम के बाद 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रयागराज में होंगे।

23 दिसंबर को बनारस में किसानों के बीच होंगे पीएम
जानकारी के मुताबिक प्रयागराज में मोदी महिलाओं के एक बहुत बड़े कार्यक्रम को संबोधित करने वाले हैं। भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में शामिल एक वरिष्ठ नेता से मिली जानकारी के मुताबिक इस दौरान तकरीबन दो लाख महिलाएं कार्यक्रम में शामिल होंगी। यह महिलाएं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हुई हैं। जिनमें आशा बहुएं और एएनएम समेत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी होंगी। कोविड के दौरान किए गए कार्यों में इन कर्मचारियों की भूमिका को प्रधानमंत्री न सिर्फ सराहेंगे बल्कि इनके बेहतर भविष्य को लेकर की जाने वाली तमाम योजनाओं के बारे में चर्चा करेंगे। प्रयागराज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बाद 23 दिसंबर को बनारस में किसानों का एक बहुत बड़ा सेमिनार होने जा रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत कर सकते हैं। इस दौरान वह किसानों से मुखातिब होंगे। इन 6 दिनों में 3 कार्यक्रमों में शिरकत करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 तारीख को कानपुर में दो बड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 28 दिसंबर को कानपुर में मेट्रो का शुभारंभ करेंगे और आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में भी शिरकत करेंगे। 
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दक्षिण भारत के कई नेता भी प्रचार करने यूपी आएंगे
भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सिर्फ प्रधानमंत्री के ही ताबड़तोड़ दौरे नहीं हो रहे हैं बल्कि योजना है कि दक्षिण भारत के भाजपा सांसदों को भी उत्तर प्रदेश के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर समेत अयोध्या में बन है राम मंदिर समेत यूपी में हो रहे विकास को देखने के लिए भेजा जाए। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में गुरुवार को दक्षिण भारत के पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरला के सांसदों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की भव्यता के बारे में उन सांसदों से न सिर्फ चर्चा की बल्कि उनको काशी विश्वनाथ कॉरिडोर समेत और हुए विकास कार्यों को देखने के लिए भी कहा। भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों का कहना है कि दक्षिण भारत के इन पांच राज्यों के सांसदों का दल जल्द ही न सिर्फ बनारस में होगा बल्कि अयोध्या भी पहुंचेगा। इससे पहले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों समेत केंद्रीय मंत्रियों का जमावड़ा काशी में लगा था। 

भाजपा के पास है मास्टर प्लान- विशेषज्ञ
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी एक संदेश देना चाहती है कि उत्तर प्रदेश किस तरीके से अन्य राज्यों के लिए, नेताओं, सांसदों और मुख्यमंत्रियों के लिए रोल मॉडल के तौर पर डिवेलप हो रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता जेएस कॉल कहते हैं कि जिस राज्य में चुनाव है वहां पर अगर दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े-बड़े नेता सांसद पहुंच रहे हैं तो उसका असर चुनावी राज्य की जनता के मानसिक पटल पर पड़ता ही है।  वो कहते हैं कि ऐसा एक स्ट्रेटिजी के तौर पर होता है। लेकिन यह स्ट्रेटजी तभी काम आती है जब आपके पास आपके राज्य में दिखाने के लिए या संदेश देने के लिए कुछ हो। वह कहते हैं इसमें भारतीय जनता पार्टी निश्चित तौर पर बाजी मार रही है। आस्था के नाम पर भाजपा जहां उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की बात कर अपने बड़े नेताओं को यहां भेज रही है वहीं विकास के नाम पर उत्तर प्रदेश में हुए कई परियोजनाओं को अलग-अलग राज्यों में अंगीकार करने के लिए भी वहां के मुख्यमंत्री और सांसदों समेत अन्य नेताओं को उत्तर प्रदेश भेज रही है।

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