संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पांच अस्थायी सीटों के लिए 17 जून को चुनाव कराए जाएंगे। एशिया प्रशांत खंड की सीट के लिए भारत की जीत पक्की मानी जा रही है। वहीं, भारत ने इस चुनाव के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीट सुरक्षित करने के अपने अभियान की प्राथमिकताएं सामने रख दी हैं और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया है कि देश ऐसे समय में एक सकारात्मक वैश्विक भूमिका निभा सकता है जब कोविड-19 वैश्विक महामारी और इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव पूरी दुनिया की एक असाधारण परीक्षा लेंगे।
जयशंकर ने 17 जून, 2020 को निर्धारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के चुनावों में निर्वाचित सीट सुरक्षित करने के अपने आगामी अभियान के लिए भारत की प्राथमिकताएं दर्शाने के लिए यहां एक कार्यक्रम में विवरण पुस्तिका का विमोचन किया।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान मे कहा कि एशिया-प्रशांत समूह के एकमात्र समर्थित सदस्य के तौर पर भारत की उम्मीदवारी के सफल होने की पूरी संभावना है। अगर भारत को चुना जाता है तो यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का आठवां कार्यकाल होगा और उसका दो साल का कार्यकाल जनवरी 2021 में शुरू होगा।
जयशंकर ने कहा कि सुरक्षा परिषद में हम 10 साल पहले चुने गए थे, हम अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा की चार विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे हैं - तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय शासन की सामान्य प्रक्रिया अत्यधिक दबाव झेल रही है, पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां अनियंत्रित रूप से जारी हैं- आतंकवाद ऐसी समस्याओं का जबर्दस्त उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थानों में कोई सुधार नहीं हुआ है और प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ा है, इसलिए वे परिणाम देने में कम सक्षम हैं, कोविड-19 वैश्विक महामारी और इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव विश्व की असाधारण परीक्षा लेंगे। जयशंकर ने कहा कि इस असाधारण स्थिति में भारत एक सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि हम हमेशा से तार्किक आवाज और अंतरराष्ट्रीय कानून के तरफदार रहे हैं। हम वैश्विक मुद्दों के प्रति हमारे दृष्टिकोण में संवाद, विचार-विमर्श और निष्पक्षता की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत उस वैश्विक विकास पर जोर देता है जिसमें जलवायु परिवर्तन और गरीबी उन्मूलन को धरती के भविष्य के लिए अहम माना जाए।
बता दें कि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पांच अस्थायी सीटों के लिए 17 जून को चुनाव होने वाला है। विश्व निकाय के अंतरिम कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी गई है। एशिया प्रशांत खंड में 2021-22 के कार्यकाल के लिए भारत इस अस्थायी सीट के लिए उम्मीदवार है।
इस सीट के लिए भारत की जीत तय मानी जा रही है क्योंकि इस खंड में भारत एकमात्र सीट पर अकेला दावेदार है। भारत की उम्मीदवारी को चीन और पाकिस्तान समेत 55 देशों के एशिया-प्रशांत समूह ने पिछले साल जून में सर्वसम्मति से समर्थन दिया था।
महासभा ने पिछले हफ्ते कोरोना महामारी के कारण प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए नई मतदान व्यवस्था के तहत सुरक्षा परिषद चुनाव कराने का निर्णय लिया था। मतदान के तौर तरीकों में किसी प्रकार का बदलाव भारत की संभावनाओं को बहुत प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि एशिया प्रशांत क्षेत्र से वह एकमात्र उम्मीदवार है और इसका कार्यकाल जनवरी 2021 से शुरू होगा।
193 सदस्य गुप्त बैलेट के जरिए करेंगे मतदान
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव महासभा के हॉल में होते हैं और इस दौरान सभी 193 सदस्य गुप्त बैलेट के जरिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। कोविड-19 के कारण वैश्विक निकाय के मुख्यालय में जून के अंत तक की सभी बैठकें स्थगित कर दी गई हैं।
नई व्यवस्था के तहत महासभा के अध्यक्ष तिज्जानी मुहम्मद बंदे सभी सदस्य देशों को एक पत्र लिखेंगे। यह पत्र पहले राउंड के गुप्त बैलेट मतदान से कम से कम 10 कार्य दिवस पहले लिखा जाएगा, जिसमें सदस्यों को चुनाव की तारीख, रिक्त सीटों की संख्या, मतदान स्थल और आने जाने की सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
कनाडा, आयरलैंड व नॉर्वे ‘पश्चिम यूरोप व अन्य देशों’ की श्रेणी में दो सीटों के लिए दावेदार हैं। दूसरी ओर ‘लातिन अमेरिका व कैरेबियाई देश’ श्रेणी से मैक्सिको एकमात्र उम्मीदवार है । केन्या व जीबूती अफ्रीकी समूह से मैदान में हैं।
इससे पहले भारत अस्थायी सीटों पर परिषद के सदस्य के तौर पर 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 और 2011-2012 में निर्वाचित हो चुका है।