कोरोना पर काबू पाने के लिए एक तरफ जहां केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय टेस्टिंग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, तो मुंबई जहां देश का 20 फीसद कोरोना संक्रमित मरीज हैं, वहां मई में कोरोना टेस्टिंग में कमी आई है। मुंबई शहर ने इस बीच 4,000-4,500 रोजाना टेस्ट किए हैं जबकि शहर की 10,000 टेस्ट रोजाना करने की क्षमता है।
मुंबई में शुरुआत से एक लक्ष्य बनाकर टेस्टिंग की जा रही थी कि जिसमें संक्रमित लोगों के प्राथमिक संपर्क का ही टेस्ट करना, जिनमें लक्षण दिख रहे हैं उन्हें टेस्ट करना, फ्रंटलाइन वर्कर का टेस्ट करना शामिल था। प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल उन्हीं लोगों का टेस्ट किया जा रहा था जिनमें खतरे का डर ज्यादा था।
नगर निगर कमिश्नर इकबाल चहल के मुताबिक मुंबई में दस लाख लोगों पर 13,400 टेस्ट किए जा रहे हैं। जबकि मुंबई में कोरोना के कुल मामले 44,931 मामले हैं और चेन्नई में 18,693 लोग कोविड-19 से संक्रमित हैं। मुंबई में कोरोना के मामले चेन्नई की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है जबकि चेन्नई में दस लाख लोगों पर 15,500 टेस्ट किए जा चुके हैं।
मुंबई में टेस्टिंग कम होने पर बृहंमुंबई नगरपालिका कमिश्नर सुरेश कुकानी का कहना है कि पहले शहर का योगदार पूरे राज्य के मुकाबले इसलिए ज्यादा था क्योंकि दूसरे जिले उतनी टेस्टिंग नहीं कर रहे थे, अब दूसरे जिले में तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों की टेस्टिंग करने लगे हैं।
आईसीएमआर के डाटा के मुताबिक पूरे देश में एक जून तक 41 लाख से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है। महाराष्ट्र में कोविड-19 टेस्टिंग की 78 प्रयोगशालाएं हैं, जिसमें अभी तक 4,83 लाख लोगों का टेस्ट हो चुका है और अकेले मुंबई में 2.02 लाख लोगों के टेस्ट कर लिए गए हैं।