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देश के 20 फीसदी कोरोना मामले अकेले मुंबई में लेकिन टेस्ट क्षमता घटकर हुई 4,000 प्रति दिन

Fri, 05 Jun 2020 11:48 AM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

  • अकेले मुंबई में देश का 20 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज
  • मुंबई में मई में कोरोना टेस्ट की क्षमता घटकर 4,000-4,500 हुई
  • देश में अबतक 41 लाख से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट हो चुका है
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
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कोरोना पर काबू पाने के लिए एक तरफ जहां केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय टेस्टिंग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, तो मुंबई जहां देश का 20 फीसद कोरोना संक्रमित मरीज हैं, वहां मई में कोरोना टेस्टिंग में कमी आई है। मुंबई शहर ने इस बीच 4,000-4,500 रोजाना टेस्ट किए हैं जबकि शहर की 10,000 टेस्ट रोजाना करने की क्षमता है। 

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मुंबई में टेस्टिंग की संख्या महाराष्ट्र में होने वाली टेस्टिंग से काफी अंतर है। महाराष्ट्र ने अपनी कोरोना टेस्टिंग क्षमता बढ़ाई है लेकिन मुंबई में कोरोना टेस्ट कम हो रहे हैं। मुंबई और पुणे में ही महाराष्ट्र के 70 फीसद कोरोना के मरीज हैं लेकिन अब राज्य के 50 फीसद टेस्ट ही इन दोनों शहरों में हो रहे हैं।


इधर पुणे रोजाना 1,200-,1500 टेस्ट कर रहा है। शुरुआत में मुंबई में पूरे राज्य की तुलना में 55 फीसद कोरोना के टेस्ट हो रहे थे जो मई के अंत तक आकर 30 फीसदी हो गया। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि माार्च में मुंबई में कोरोना के 70-75 फीसदी कोरोना टेस्ट हुए लेकिन मई में आते-आते टेस्ट की क्षमता कम हो गई, जो कि चिंताजनक बात है। 
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मुंबई में कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। मई की शुरुआत में मुंबई में प्रति दिन 750 कोरोना के मामले आते थे लेकिन मई के अंत तक ये मामले दोगुने होकर 1,500 के पास पहुंच गए। जिसके बाद मुंबई में कोरोना संक्रमण की दर 35 फीसदी हो गई जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है।

देश में कोरोना संक्रमण की दर पांच फीसदी है और लगभग हर राज्य में कोरोना की सकारात्मकता दर इतनी ही है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जुड़ी हुई डॉ सौमित्रा घोष का कहना है कि मुंबई में प्रशासन ने कोरोना टेस्टिंग के लिए दकियानुसी दृष्टिकोण रखा, जिसके तहत शहर में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे थे और संक्रमण को फैलने से रोक पाना मुश्किल हो रहा था।

मुंबई में टेस्टिंग को लेकर अलग-अलग मान्यताएं है। महाराष्ट्र के मेडिकल शिक्षक सचिव का कहना है कि मुंबई में कोरोना के इतने मरीज इसलिए हैं क्योंकि वहां टेस्टिंग बेहतर ढंग से हो रही है लेकिन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस के पूर्व डीन डॉ टी सुंदर्रमन का कहना है कि मुंबई में टारगेट ग्रुप में ही उचित ढंग से टेस्ट नहीं हो रहे थे।

उन्होंने कहा कि मुंबई में सकारात्मक दर इतनी ज्यादा होने का मतलब है कि वहां कोरोना के मामले तेजी से फैल रहे हैं। अगर ज्यादा से ज्यादा टेस्ट नहीं किए जाएंगे कई सारे कोरोना संक्रमित मामलों के बारे में पता नहीं चल पाएगा।

मुंबई में शुरुआत से एक लक्ष्य बनाकर टेस्टिंग की जा रही थी कि जिसमें संक्रमित लोगों के प्राथमिक संपर्क का ही टेस्ट करना, जिनमें लक्षण दिख रहे हैं उन्हें टेस्ट करना, फ्रंटलाइन वर्कर का टेस्ट करना शामिल था। प्रोटोकॉल के मुताबिक केवल उन्हीं लोगों का टेस्ट किया जा रहा था जिनमें खतरे का डर ज्यादा था। 

नगर निगर कमिश्नर इकबाल चहल के मुताबिक मुंबई में दस लाख लोगों पर 13,400 टेस्ट किए जा रहे हैं। जबकि मुंबई में कोरोना के कुल मामले 44,931 मामले हैं और चेन्नई में 18,693 लोग कोविड-19 से संक्रमित हैं। मुंबई में कोरोना के मामले चेन्नई की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है जबकि चेन्नई में दस लाख लोगों पर 15,500 टेस्ट किए जा चुके हैं।

मुंबई में टेस्टिंग कम होने पर बृहंमुंबई नगरपालिका कमिश्नर सुरेश कुकानी का कहना है कि पहले शहर का योगदार पूरे राज्य के मुकाबले इसलिए ज्यादा था क्योंकि दूसरे जिले उतनी टेस्टिंग नहीं कर रहे थे, अब दूसरे जिले में तेजी से कोरोना संक्रमित मरीजों की टेस्टिंग करने लगे हैं।

आईसीएमआर के डाटा के मुताबिक पूरे देश में एक जून तक 41 लाख से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग हो चुकी है। महाराष्ट्र में कोविड-19 टेस्टिंग की 78 प्रयोगशालाएं हैं, जिसमें अभी तक 4,83 लाख लोगों का टेस्ट हो चुका है और अकेले मुंबई में 2.02 लाख लोगों के टेस्ट कर लिए गए हैं।

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