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तकनीक: दिल्ली-जयपुर के बीच हो सकता है भारत का पहला ई-हाईवे, जानें कैसे सड़क पर चलते हुए चार्ज होंगे ई-व्हीकल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 18 Sep 2021 07:18 AM IST

सार

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक दिन पहले ही कहा था कि उनका मंत्रालय दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाइवे के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत कर रहा है। 
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, दिल्ली और जयपुर के बीच ई-हाईवे निर्माण के लिए विदेशी कंपनी से बात की जा रही है। - फोटो : Amar Ujala
दुनियाभर में इस वक्त इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाए जाने की कोशिशें तेज हुई हैं। भारत में भी कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के तहत ई-वाहनों का प्रचार जारी है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें खास बढ़ावा नहीं मिला है। इसके पीछे कई वजहें दी जाती हैं, लेकिन जो दो सबसे बड़ी वजहें अब तक सामने आई हैं, उनमें एक है ई-वाहनों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी। अब इन्हीं कमियों को दूर करने का एलान करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका मंत्रालय दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाइवे के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत कर रहा है। 
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, दिल्ली और जयपुर के बीच ई-हाईवे निर्माण के लिए विदेशी कंपनी से बात की जा रही है। - फोटो : Amar Ujala
दुनियाभर में इस वक्त इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाए जाने की कोशिशें तेज हुई हैं। भारत में भी कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के तहत ई-वाहनों का प्रचार जारी है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें खास बढ़ावा नहीं मिला है। इसके पीछे कई वजहें दी जाती हैं, लेकिन जो दो सबसे बड़ी वजहें अब तक सामने आई हैं, उनमें एक है ई-वाहनों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी। अब इन्हीं कमियों को दूर करने का एलान करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनका मंत्रालय दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाइवे के निर्माण के लिए एक विदेशी कंपनी से बातचीत कर रहा है। 

क्या रही है ई-व्हीकल का इस्तेमाल करने वाले लोगों की शिकायत?

विद्युत ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के ज्यादातर खरीदारों की शिकायत है कि आम हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर सरकार या निजी कंपनियों की तरफ से चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते उनके पास अपनी गाड़ियों को चार्ज करने के काफी कम संसाधन हैं। उधर ईवी गाड़ियों के कम प्रचलन और तकनीक की वजह से इनके स्पेयर पार्ट्स की कीमतें भी काफी ज्यादा हैं। इसके चलते यह गाड़ियां पारंपरिक पेट्रोल-डीजल या सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों के मुकाबले महंगी साबित होती हैं। 

लोगों की शिकायत दूर करने के लिए नितिन गडकरी क्या बोले?

इस समस्या को दूर करने पर जोर देते हुए नितिन गडकरी ने कहा, ‘‘दिल्ली से जयपुर तक इलेक्ट्रिक हाईवे बनाना मेरा सपना है। यह अभी भी एक प्रस्तावित परियोजना है। ’’ गडकरी ने कहा कि एक परिवहन मंत्री के रूप में, उन्होंने देश में पेट्रोल और डीजल के उपयोग को खत्म करने का संकल्प लिया है। उन्होंने देश में ई-वाहनों को बढ़ावा देने और उसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रतिबद्धता भी जताई। 

पहले जानें- क्या हैं ई-हाईवे?

इलेक्ट्रिक हाईवे को किसी पारंपरिक हाईवे से अलग बनाने की जरूरत नहीं होती। यानी एक ही हाईवे में पारंपरिक गाड़ियां और इलेक्ट्रिक गाड़ियां साथ चल सकती हैं। हालांकि, जहां पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों को हाईवे में बीच में ही ईधन भराने के लिए रुकना पड़ता है, वहीं इलेक्ट्रिक हाईवे पर चलने वाली ई-कारों को इस समस्या से नहीं जूझना पड़ता। ऐसे हाईवे में ई-कार, ई-ट्रक या ई-बस के लिए ऐसे इंतजाम किए जाते हैं कि वे सड़क पर चलते ही चार्ज हो जाएं। 

ई-हाईवे पर चलते हुए कैसे चार्ज हो जाती हैं गाड़ियां?

1. पैंटोग्राफ मॉडल
अब तक इलेक्ट्रिक हाईवे में किसी वाहन को चार्ज करने में तीन तरह की तकनीकों का इस्तेमाल होता है। पहली तकनीक है हाईवे पर ओवरहेड केबल के इस्तेमाल की। इसे पैंटोग्राफ मॉडल (Pantograph Model) कहा जाता है। भारत में यही तकनीक सबसे बेहतर मानी जा रही है। इस तकनीक से चार्जिंग के लिए ई-व्हीकल के ऊपर एक कॉन्टैक्ट आर्म दिया जाता है। सड़क पर चलते रहने के दौरान ही किसी भी ई-वाहन का यह हिस्सा चार्जिंग के लिए ऊपर लगे तारों (ओवरहेड केबल्स) के जाल से जुड़ जाता है। इससे गाड़ी हाईवे पर चलते हुए लगातार चार्ज होती रहती है। मौजूदा समय में जर्मनी अपनी इलेक्ट्रिक सड़कों पर इसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। 

2. कंडक्शन मॉडल
इसके अलावा दुनिया में ई-हाईवे दो और तकनीकें पर काम करते हैं। पहली तकनीक है गाड़ियों को चार्ज करने वाली सड़कें। इनमें गाड़ियों के कॉन्टैक्ट आर्म नीचे की तरफ लगे होते हैं और ये सड़क से चार्जिंग लेकर चलते हैं। इस तकनीक को कंडक्शन (संवाहन) मॉडल कहा जाता है। हालांकि, इसके लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक करंट पैदा करने वाली खास सड़कों के निर्माण की जरूरत होती है, जो कि अपने आप में एक महंगा सौदा है। 

3. इंडक्शन मॉडल
तीसरी तकनीक इंडक्शन (प्रवर्तन) मॉडल की है, जहां वाहनों को चार्जिंग के लिए किसी भी तरह के कॉन्टैक्ट आर्म यानी संपर्क की जरूरत नहीं होती। इनमें वाहन सड़क और गाड़ी में लगी इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक तकनीक से चार्ज हो जाते हैं। मौजूदा समय में स्वीडन अपने ई-हाईवे को कंडक्शन मॉडल पर तैयार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए पैंटोग्राफ मॉडल सबसे बेहतर हैं, क्योंकि यह काफी हद तक भारत के रेल नेटवर्क की तरह ही हैं और इनसे ऊर्जा की खपत के साथ पैसे भी बचते हैं। 

दुनिया में कहां-कहां है ई-हाईवे का नेटवर्क?

कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए फिलहाल पूरे यूरोप से लेकर एशिया और अमेरिका तक ई-व्हीकल नीतियों को लागू करने में जुटे हैं। इसी के तहत जर्मनी और स्वीडन जैसे देशों में इलेक्ट्रिक हाईवे का निर्माण जारी है। स्वीडन ने सबसे पहले 2018 में दुनिया की पहली विद्युतीकृत (इलेक्ट्रिफाइड) सड़कें बनाई थीं, जिनसे कार और ट्रकों की बैट्री चलने के दौरान ही चार्ज हो जाती हैं। 

इसके बाद जर्मनी ने 2019 में पहला इलेक्ट्रिक हाईवे तैयार किया, जिसमें हाइब्रिड ट्रकों के लिए चार्जिंग की व्यवस्था तैयार की गई। फ्रैंकफर्ट में इस सड़क के निर्माण की शुरुआत तब सीमेंस ने की थी और यह 9 किमी लंबी बनाई गई थी। इसके अलावा ब्रिटेन और अमेरिका में भी विद्युतीकृत सड़कें और हाईवे बनाए जा चुके हैं। 
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