छात्रा ने मोबाइल तथा डिजिटल जर्नलिज्म को एक बेहतरीन माध्यम बताते हुए कहा कि वह अपने मीडिया करियर में इसका पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर जलवायु संरक्षण के विषय में आमजन को जागरूक करने का प्रयास करेंगी।
जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान के लिए हम सभी को एकजुट होकर इससे निपटने की आवश्यकता है। यह कहना है मेवाड़ यूनिवर्सिटी की छात्रा सुप्रिया रानी का। छात्रा ने कहा कि इन दिनों हमने देखा, पढ़ा और सुना है कि कैसे जलवायु परिवर्तन के कारण बादल फटने जैसी आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं। नदियां उफान पर हैं और कई राज्यों में जलप्रलय की स्थिति बनी हुई है। कहीं भारी बारिश, कहीं बाढ़ तो कहीं लोग बारिश की बूंद-बूंद का इंतजार कर रहे हैं।
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छात्रा ने आगे कहा कि मैंने अमर उजाला फाउंडेशन तथा यूनिसेफ इंडिया द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में यह जाना कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशें ही हमें इस विशाल संकट से उबार सकती हैं। इसके लिए हमें कुछ नई आदतों को अपनाना होगा। जैसे प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकें, पेड़-पौधों की अतिरिक्त कटाई न करें, नदियों में रसायन या कूड़ा-कचरा न फेकें, खुले में कचरा न जलाएं और किसान भाई पराली निपटान के लिए पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाएं जिससे हर प्रकार के प्रदूषण को भी रोका जा सके।
छात्रा ने मोबाइल तथा डिजिटल जर्नलिज्म को एक बेहतरीन माध्यम बताते हुए कहा कि वह अपने मीडिया करियर में इसका पूरी जिम्मेदारी से इस्तेमाल कर जलवायु संरक्षण के विषय में आमजन को जागरूक करने का प्रयास करेंगी।