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UN का अनुमान: भारत की आबादी 144 करोड़ हुई, इनमें 0-14 आयु वर्ग की संख्या 24%, 65 या इससे अधिक उम्र के 7% लोग

Wed, 17 Apr 2024 12:00 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्ट में बताया गया कि पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 71 और महिलाओं की 74 वर्ष है। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 साल में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में जो प्रगति हुई है, उसमें दुनियाभर के सबसे पिछड़े समुदायों को ज्यादातर नजरअंदाज ही किया गया है।
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भारत की जनसंख्या (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 144 करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें 0-14 आयु वर्ग के लोगों की आबादी 24 फीसदी है। 2011 में हुई पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में प्रसव के दौरान होने वाली महिलाओं की मौतों में गिरावट हुई है।
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भारत की जनसंख्या में 65 या इससे अधिक उम्र वाले सात प्रतिशत
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की जनसंख्या में 0-14 आयु वर्ग वाले 24 फीसदी, जबकि 10-19 आयु वर्ग वाले 17 प्रतिशत है। वहीं, 10-24 आयु वर्ग वालों की संख्या 26 फीसदी है। भारत की जनसंख्या में 10-64 आयु वर्ग वाले 68 प्रतिशत, जबकि 65 और उससे अधिक उम्र वाले सात प्रतिशत लोग शामिल हैं। पुरुषों की जीवन प्रत्याशा 71 और महिलाओं की 74 वर्ष है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 30 साल में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य में जो प्रगति हुई है, उसमें दुनियाभर के सबसे पिछड़े समुदायों को ज्यादातर नजरअंदाज ही किया गया है। 

प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में गिरावट
भारत में मातृ मृत्यु में काफी गिरावट आई है, जो दुनिया भर में होने वाली ऐसी सभी मौतों का 8 प्रतिशत रह गया है। पीएलओएस ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत के 640 जिलों में हाल ही में की गई रिसर्च से पता चला है कि लगभग एक तिहाई जिलों ने मातृ मृत्यु दर को कम करने का सतत विकास लक्ष्य हासिल किया है। इनमें प्रति 100,000 जीवित जन्म पर प्रजनन के दौरान महिलाओं की मृत्यु दर 70 से कम है, लेकिन 114 जिलों में अभी भी यह अनुपात 210 या उससे कुछ ज्यादा है।
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रिपोर्ट में कहा गया, "दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों, शरणार्थियों, जतीय अल्पसंख्यकों, समलैंगिग समुदाय के लोगों, एचआईवी से पीड़ित और वंचित जातियों को सबसे ज्यादा यौन और प्रजनन स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है।" हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सफलता का श्रेय अक्सर किफायती, गुणवत्तापूर्ण मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच के साथ स्वास्थ्य नतीजों पर लैंगिक असमानता के प्रभाव को दूर करने की कोशिशों को दिया जाता है।''
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