फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Unauthorised Constructions: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पुलिस-अधिकारियों की मिलीभगत के बिना अवैध निर्माण संभव नहीं

Wed, 24 Aug 2022 09:49 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने पर निर्माण चल रहा है और स्थानीय पुलिस अधिकारियों और नगरपालिका अधिकारियों की मिलीभगत के बिना कोई ईंट नहीं रखी जा सकती है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में अनधिकृत निर्माण पर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि स्थानीय पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना एक भी ईंट नहीं रखी जा सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन मामलों की न्यायिक जांच होनी चाहिए और कहा कि वह अवैध निर्माणों की जांच के लिए गठित निगरानी समिति के फैसलों से निपटने के लिए दो सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक न्यायिक समिति का गठन करेगी। अनधिकृत निर्माण अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं के बीच आपसी सहयोग से किए जाते हैं। अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने पर निर्माण चल रहा है और स्थानीय पुलिस अधिकारियों और नगरपालिका अधिकारियों की मिलीभगत के बिना कोई ईंट नहीं रखी जा सकती है।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि जब कोई अधिकारी बदलता है, तो कोई भी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करता है और कहता है कि यह पिछले अधिकारी के कार्यकाल के दौरान हुआ था। इससे निपटने के लिए कोई तरीका होना चाहिए। क्या इससे निपटने के लिए कोई सुझाव है? हम इस प्रक्रिया में एक ट्रायल कोर्ट बन गए हैं। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि इस अदालत को मामले से हाथ खींच लेना चाहिए। इन मामलों की न्यायिक जांच होनी चाहिए जो हमारी मदद कर सकते हैं। 

शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल या दिल्ली उच्च न्यायालय को भेजकर अवैध निर्माणों को विनियमित करने के प्रयास सही परिणाम नहीं देते हैं और इस तरह यह मामला अदालत में ही रहता है। हर मामले के तथ्यों का विश्लेषण करने पर हम मानते हैं कि यह सुप्रीम कोर्ट का कार्य नहीं है। आवेदनों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि इनसे निपटने के लिए समय निकालना मुश्किल है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें