उन्होंने कहा, 'हम मणिपुर में मई से अंतर-सांप्रदायिक हिंसा पर बोलने के लिए मैतई लीपुन और अरामबाई तेंगोल समूहों द्वारा मानवाधिकार रक्षक बबलू लोइतोंगबाम को दी गई धमकियों से चिंतित हैं। हम अधिकारियों से उनकी, उनके परिवार और घर की रक्षा करने और अपराधियों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह करते हैं।'
भीड़ ने गुरुवार शाम को इंफाल पश्चिम के क्वाकीथेल इलाके में लोइतोंगबाम के घर में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने बताया कि हमले में कोई घायल नहीं हुआ लेकिन उनकी संपत्ति को कुछ नुकसान हुआ है। पुलिस ने कहा, 'करीब 30 लोग आए और लोइतोंगबाम के बारे में पूछताछ की और उनसे तीन मई को पहली बार हिंसा भड़कने के बाद एक मीडिया चैनल को दिए गए बयानों पर स्पष्टीकरण देने को कहा।'
लोइतोंगबाम ने इंटरव्यू में दावा किया था कि इंफाल घाटी में सभी चर्चों को ध्वस्त कर दिया गया है। गुरुवार रात को सोशल मीडिया पर कथित रूप से जारी एक बयान में लोइतोंगबाम ने स्पष्ट किया, 'जब राज्य में हिंसा शुरू हुई, तो मैंने एक साक्षात्कार में कहा था कि अरामबाई तेंगोल और मैतई लीपुन की गतिविधियां आरएसएस के समान हैं और इन समूहों ने हिंसा को बढ़ाया है। मैं इन बयानों को वापस लेना चाहता हूं। मैंने यह भी कहा था कि इंफाल घाटी में सभी चर्चों को ध्वस्त कर दिया गया है। यह भी गलत है क्योंकि नगा समुदाय के सभी चर्च अभी भी खड़े हैं। मैंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि मैं उस समय मणिपुर में नहीं था और मैंने इसे बाहरी स्रोतों से सुना था।' हालांकि लोइतोंगबाम से उनके घर में तोड़फोड़ के बाद उनकी टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं किया जा सका।