गुटखा खाकर कहीं भी थूकने वाले लोग अब होशियार हो जाएं। मोदी सरकार के स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत अभियान के यूजीसी ने एक नए अभियान की शुरुआत की है। यूजीसी ने सार्वजनिक जगहों पर थूकने की आदत को सामाजिक समस्या बताते हुए, इसके खिलाफ आवाज उठाने को कहा है।
फाइन का है प्रावधान
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश के सभी विश्वद्यालयों से सार्वजनिक जगहों पर 'थूकना मना है' अभियान चलाने को कहा है। यूजीसी का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान में प्रावधान है कि सार्वजनिक जगहों पर थूकने वाले लोगों पर सरकारी एजेंसियां फाइन लगा सकती हैं। लेकिन प्रावधान होने के बावजूद कुछ नहीं बदला है, जिसके चलते सरकार ने इस मुद्दे पर अलग से अभियान चलाने की पहल की है।
युवा बढ़ाएं जागरूकता
यूजीसी ने हाल ही में देश के सभी केन्द्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों को एक सर्कुलर जारी करके कहा है कि कहीं भी थूकने की आदत से टीबी जैसे संक्रामक रोग हो सकते हैं। यूजीसी के मुताबिक सार्वजनिक स्थानों पर थूकना एक गंभीर समस्या है और हम लोगों में से अधिकांश रोजाना ऐसा होते हुए देखते हैं। यूजीसी ने अपने सर्कुलर के जरिए अपील की है कि जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए देश का युवा इसमें अहम भूमिका निभा सकता है।
'निकाली जाएं रैलियां'
यूजीसी ने अपने सर्कुलर में छात्रों से थूकने, कचरा फैलाने, हरियाली को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक जगहों पर स्मोकिंग रोकने के लिए रैलियां निकालने और पब्लिक इवेंट के जरिए अभियान चलाने के लिए कहा है।
एनएसएस वॉलेंटियर्स भी लें हिस्सा
इसके अलावा यूजीसी ने अधिकांश कॉलेजों में चलने वाले नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) के वॉलेंटियर्स से भी इस सामाजिक समस्या पर हिस्सेदारी निभाने के लिए कहा है। साथ ही यूजीसी ने यह भी कहा है कि कैंपस में पोस्टर और स्टीकर्स के जरिए बताया जाए कि ऐसे लोग जो तंबाकू का सेवन करते हैं, उनके थूकने से कई संक्रामक बीमारियां दूसरों को हो सकती हैं। सर्कुलर में यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों और संबंधित कॉलेजों से इस विषय पर जरूरी कदम उठाने का आदेश भी दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था आइडिया
दो साल पहले केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि इस पर अभियान चलाने के लिए अलग से बजट की कोई व्यवस्था नहीं हैं, लेकिन जागरुकता के जरिए इससे रोका जा सकता है।