उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार से दो दिन के लिए त्रिपुरा पहुंचेंगे। वे वहां चल रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए कई जनसभाओं को संबोधित करेंगे। योगी आदित्यनाथ का त्रिपुरा दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंदुत्व को राष्ट्रीय धर्म बताने के उनके बयान पर जमकर राजनीति हो रही है।
भाजपा के स्टार प्रचारकों में शामिल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ त्रिपुरा में भाजपा के लिए वोट मांगेंगे। इस पूर्वोत्तर राज्य को वाम दलों के गढ़ के रूप में देखा जाता था, लेकिन भाजपा ने पूर्वोत्तर के राज्यों में अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित कर वामदलों की वैचारिक स्वीकार्यता को गहरी चुनौती दी थी। अभी भी वामदल यहां के सबसे प्रमुख दलों में शामिल हैं और वे अपनी वापसी के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मैदान में मजबूती से उतरने के कारण इस बार मामला त्रिकोणीय होता दिखाई पड़ रहा है। ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में अपने प्रभावी शासन और बंगाली भाषा भाषी जनता के कारण त्रिपुरा में भी सफल हो सकती हैं, ऐसी आशंका जताई जा रही है। यदि तृणमूल कांग्रेस राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहती है तो इसका सीधा असर ममता बनर्जी की केंद्रीय स्तर की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार त्रिकोणीय लड़ाई में भाजपा एक बार फिर मजबूती से सत्ता में वापसी कर सकती है। अनुमान यह भी जताया जा रहा है कि तृणमूल पार्टी जैसे दलों के मैदान में होने से स्थिति गुजरात विधानसभा चुनाव जैसी बन सकती है जहां भाजपा ने आम आदमी पार्टी की उपस्थिति के कारण ऐतिहासिक सफलता हासिल करने में कामयाब रही थी।
त्रिपुरा की 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने पिछले चुनाव में 43.59 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 36 सीटों पर सफलता पाई थी, जबकि सीपीआई(एम) को (2013 के चुनाव में 49 सीटों की तुलना में) केवल 16 सीटों पर सफलता मिली थी। इसे वामदलों के बड़े किले के गिरने की तौर पर देखा गया था।