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Tripura: उच्च शिक्षा में त्रिपुरा का एक और कदम, बौद्ध विश्वविद्यालय की नींव रखने के लिए विधेयक किया पेश

Mon, 26 Sep 2022 09:32 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला

सार

सदन में विधेयक पर चर्चा करते हुए भाजपा विधायक शंकर राय ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही विश्वविद्यालय के लिए 75.84 लाख कीमत की 74.28 एकड़ जमीन दे चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्रिपुरा विधानसभा ने सोमवार को मनु बांकुल में धम्म दीपा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए सर्वसम्मति से एक विधेयक पारित कर दिया गया। शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने सत्र के पहले दिन 23 सितंबर को धम्म दीपा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध विश्वविद्यालय विधेयक-2022 पेश किया था। विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, दंत चिकित्सा, प्रबंधन, कानून और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के अध्ययन को बढ़ावा देगा। साथ ही इतिहास, संस्कृति, दर्शन और कला वर्ग के कोर्सज भी शामिल किए गए है। 
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सदन में विधेयक पर चर्चा करते हुए भाजपा विधायक शंकर राय ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही विश्वविद्यालय के लिए 75.84 लाख कीमत की 74.28 एकड़ जमीन दे चुकी है। सबरूम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले रॉय ने कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय के लिए 100 एकड़ और जमीन मांगी है। महामारी के कारण विश्वविद्यालय का कार्य शुरू नहीं किया जा सका। हालांकि, माकपा विधायक तपन चक्रवर्ती, पूर्व शिक्षा मंत्री ने इस मामले पर आगे विचार-विमर्श के लिए विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की।

नाथ ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में छात्रों में उच्च अध्ययन के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में राज्य में दो सरकारी विश्वविद्यालय और एक निजी विश्वविद्यालय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय है। नया बौद्ध विश्वविद्यालय खुलने से छात्रों को राज्य में और उच्च शिक्षा मिलेगी। नाथ ने कहा कि हालांकि बहुजन हिताय शिक्षा ट्रस्ट प्रस्तावित बौद्ध विश्वविद्यालय चलाएगा, लेकिन राज्य सरकार का उस पर नियंत्रण होगा जैसा कि विधेयक में उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की जानकारी में कोई बिंदू नहीं आता है तो विधेयक में संशोधन किया जा सकता है और उसे दोबारा जांच के लिए प्रवर समिति के पास भेजने की जरूरत नहीं है। जिसके बाद विधेयक को सदन में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
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