तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा में सोमवार को वैधानिक प्रस्तावों का एक नोटिस देकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा जारी अध्यादेशों पर आपत्ति जताई। सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि शीतकालीन सत्र कुछ दिनों में शुरू होने वाला है, ऐसे में इस जल्दबाजी की वजह क्या है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा लाये गये दो अध्यादेशों पर हस्ताक्षर किया। इनमें यह प्रावधान किया गया है कि ईडी या सीबीआई प्रमुख का दो साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद, केंद्र सरकार उनका कार्यकाल एक-एक साल कर लगातार तीन साल के लिए बढ़ा सकती है। पार्टी ने ईडी और सीबीआई प्रमुखों के कार्यकाल में विस्तार करने के लिए सरकार द्वारा अध्यादेशों के जरिए संशोधित किये गये दोनों कानूनों पर सोमवार को दो अलग-अलग वैधानिक प्रस्तावों का नोटिस दिया।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया, दो अध्यादेश ईडी प्रमुख और सीबीआई निदेशक के कार्यकाल को दो साल से बढ़ा कर पांच साल करते हैं, जबकि संसद का शीतकाल सत्र अब से दो हफ्ते में शुरू होने वाला है। आश्वस्त रहें कि विपक्षी दल भारत को निवार्चित तनाशाही में तब्दील होने से बचाने के लिए सब कुछ करेगी।
अध्यादेश गैरकानूनी, विपक्ष करे विरोध: मनीष तिवारी
वहीं, कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुखों कार्यकाल बढ़ाए जाने के अध्यादेश का विरोध किया है। तिवारी ने कहा कि ये न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि गैरकानूनी भी है। सुप्रीम कोर्ट के 1998 के जैन हवाला मामले के फैसले का खंडन करता है, जिसमें अदालत ने सीबीआई, ईडी निदेशक के कार्यकाल को 2 साल के रूप में घोषित किया, जिससे केंद्र सरकार दोनों एजेंसियों को किसी भी गलत काम में मजबूर न कर सके।
उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह अध्यादेश दरअसल, इन दोनों एजेंसियों के अधिकारियों के लिए एक सीधा निर्देश है कि केंद्र ने आपको नियुक्त किया है। इसलिए जब तक आप हमारे लिए और हमारे अनुसार काम करते रहेंगे और विपक्ष पर शिकंजा कसते रहेंगे तब तक आपका कार्यकाल बढ़ता रहेगा। उन्होंने सभी दलों से अपील की है कि इस अध्यादेश का सभी विरोध करें।