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चिंताजनक: ग्रामीण भारत में चिंताओं से जूझ रहे 45 फीसदी लोग, 73% बुजुर्गों को देखभाल की जरूरत

Tue, 13 Aug 2024 05:58 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) की स्टेट ऑफ हेल्थकेयर इन रूरल इंडिया-2024 रिपोर्ट के चौथे संस्करण में सामने आया कि देखभाल की अधिकतर जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है। भारी मांग के बावजूद केवल तीन फीसदी परिवार ही पैसे देकर देखभाल सेवाओं का विकल्प चुन पाते हैं, जो स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में एक बड़े अंतर को सामने लाता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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भारत के ग्रामीण इलाकों में 45 फीसदी लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जूझ रहे हैं। बुजुर्ग सदस्यों वाले ग्रामीण परिवारों में से 73 फीसदी ऐसे हैं, जिन्हें निरंतर देखभाल की जरूरत पड़ती है।

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दिल्ली की ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) की स्टेट ऑफ हेल्थकेयर इन रूरल इंडिया-2024 रिपोर्ट के चौथे संस्करण में सामने आया कि देखभाल की अधिकतर जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है। भारी मांग के बावजूद केवल तीन फीसदी परिवार ही पैसे देकर देखभाल सेवाओं का विकल्प चुन पाते हैं, जो स्वास्थ्य देखभाल क्षेत्र में एक बड़े अंतर को सामने लाता है। 21 राज्यों के 5,389 से अधिक परिवारों को शामिल करने वाले इस विस्तृत सर्वेक्षण में सामने आया कि 72.1 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो बुजुर्गों की देखभाल कर रही हैं। ग्रामीण इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं (एंग्जायटी) भी बढ़ रही हैं। सभी लिंगों के 45 फीसदी उत्तरदाताओं ने चिंता संबंधी समस्याओं की बात कही है, जिससे व्यापक सहायता प्रणालियों की आवश्यकता का पता चलता है।

60% लोगों के पास जीवन बीमा कवरेज नहीं
रिपोर्ट से पता चलता है कि 60 फीसदी से अधिक लोगों के पास कोई जीवन बीमा कवरेज नहीं था, न तो खुद के लिए और न ही उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य के लिए। सीमित जांच संबंधी सुविधाओं और सस्ती दवाओं तक पहुंच को लेकर चुनौतियां भी बरकरार हैं। मात्र 12.2 फीसदी उत्तरदाताओं के पास सब्सिडी वाली दवाओं तक पहुंच थी और 21 फीसदी के नजदीक में मेडिकल स्टोर तक नहीं था।
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50% लोग खेतों में काम करने से फिट
लगभग 50 फीसदी उत्तरदाताओं का कहना था कि वे अपने खेतों में काम करते हैं और शारीरिक श्रम करते हैं, इसलिए वे फिट रहते हैं। इसलिए उन्हें अतिरिक्त व्यायाम की आवश्यकता नहीं है। केवल 10 फीसदी ने योग या अन्य फिटनेस गतिविधियां करने की बात स्वीकार की।

43 फीसदी कहीं भी फेंक देते हैं घर का कूड़ा कचरा : सर्वेक्षण के अनुसार, पांच में से एक उत्तरदाता ने बताया कि उनके गांवों में जल निकासी की कोई भी व्यवस्था नहीं है, केवल 23 फीसदी के पास कवर किया हुआ जल निकासी नेटवर्क था। 43 फीसदी घरों में वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटान प्रणाली का अभाव था और उन्होंने कचरे को कहीं भी फेंक देने की बात कही।

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