अदालत ने बताया कि उसने ऐसे शब्द भी कहे जिससे साफ पता चलता है कि वह एक खास समुदाय के लोगों की हत्या करने के लिए पूरी तरह से तैयार स्थिति और दिमाग में था।'
जयपुर-मुंबई ट्रेन फायरिंग में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बर्खास्त कांस्टेबल चेतनसिंह चौधरी की जमानत याचिका डिंडोशी सत्र अदालत ने शनिवार को खारिज कर दी। चेतनसिंह को इस साल 31 अक्तूबर को जयपुर-मुंबई सुपरफास्ट एक्सप्रेस में अपने वरिष्ठ और तीन मुस्लिम यात्रियों की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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चौधरी की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। 'उसने न केवल अपने एक वरिष्ठ को बल्कि एक विशेष समुदाय के तीन अन्य लोगों को भी विशिष्ट लक्ष्य बनाकर मार डाला'। अदालत ने बताया कि उसने ऐसे शब्द भी कहे जिससे साफ पता चलता है कि वह एक खास समुदाय के लोगों की हत्या करने के लिए पूरी तरह से तैयार स्थिति और दिमाग में था।'
आरोपी की ठीक नहीं थी मानसिक स्थिति
आरपीएफ कांस्टेबल का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील पंकज घिल्डियाल और अमित मिश्रा ने इस आधार पर जमानत की प्रार्थना की थी कि हत्याएं करते समय आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसे अपने परिवार से चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता थी।
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जांच के दौरान, पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद चेतनसिंह चौधरी का उचित मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन नहीं किया। उन्होंने कहा, 'जो भी आकलन किया गया वह बेहद औपचारिक था। संपूर्ण मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए कई परीक्षण और प्रक्रियाएं हैं जिनका पालन नहीं किया गया है।
क्या कहता है अभियोजन पक्ष
अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि यह एक निर्मम हत्या थी, जहां उसने अपने पीड़ितों को उनकी शक्ल के आधार पर चुना, उनकी पहचान सुनिश्चित की और अपने वरिष्ठ की हत्या करने के बाद उन्हें भी मार डाला। वह एक सरकारी अधिकारी हैं और चिकित्सकीय रूप से फिट थे। इसीलिए उसे हथियार दिया गया था।
इसके साथ ही अभियोजन पक्ष ने उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अगर जमानत पर रिहा किया गया तो वह दूसरों को निशाना बना सकता है और समाज के लिए खतरनाक हो सकता था।