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ट्रेनों में लगने वाले झटकों से मिलेगा छुटकारा

Mon, 03 Apr 2017 05:11 AM IST
नवनीत शरण / अमर उजाला, नई दिल्ली
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रेल यात्रा के दौरान अब सीट पर झटका नहीं लगेगा। चलती गाड़ी में झटकों को कम करने के लिए संतुलित ड्राफ्ट गियर वाला सेंटर बफर कपलर (सीबीसी) लगाया जाएगा। रेलवे के लखनऊ स्थित अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के अध्ययन में चलती ट्रेन में झटकों के लिए कोच में कमी पाई गई है। बड़ी बात यह है कि झटके ना केवल परंपरागत कोचों में लगते हैं, बल्कि राजधानी व शताब्दी ट्रेनों में भी यात्री झटकों से परेशान रहते हैं, जबकि इन ट्रेनों में जर्मन तकनीक वाले एलएचबी कोच लगे हैं। लिहाजा रेलवे ने एलएचबी किस्म के सवारी डिब्बों में सेंटर बफर कपलरों को बदलने का निर्णय लिया है।
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चलती ट्रेन में झटकों से बचाव के लिए आरडीएसओ ने बैलेंस्ड ड्राफ्ट गियर के साथ सेंटर बफर कपलर विकसित कर लिया है। सिर्फ सेंटर बफर कपलर के कारण कोच झटका लेता है। नये डिजाइन पर झटकों का स्तर पिछले डिजाइन वाले कोच से काफी कम पाया गया। इसे देखते हुए रेलवे मंत्रालय ने फ्लोटिंग प्लेट ड्राफ्ट गियर लगे एलचएची किस्म के सवारी डिब्बों के सीबीसी को बदलने का निर्णय लिया है। इसमें राजधानी ट्रेन के एलएचबी सवारी डिब्बों के साथ-साथ अन्य ट्रेनों के एलएचबी सवारी डिब्बे भी शामिल है। नये डिजाइन के सीबीसी ड्राफ्ट गेयर में बैलेंस्ड ड्राफ्ट गियर है।

अगले साल 500 डिब्बों में रेट्रोफिटमेंट
रेलवे ने 1350 एलएचबी सवारी डिब्बों में बैलेंस्ड ड्राफ्ट गियर से सुसज्जित बेहतर डिजाइन के सीबीसी के रेट्रोफिटमेंट के लिए स्वीकृति पहले ही दे दी है। अगले साल के लिए 500 डिब्बों में यह रेट्रोफिटमेंट होगा। रेलवे का अनुमान है कि इस सीबीसी पर प्रति डिब्बा पांच लाख रुपये खर्च करने होंगे और कुल 1850 कोच के लिए अनुमानित लागत 92.5 करोड़ रुपये होगी। रेलवे ने यह भी निर्णय लिया है कि सभी नए पैसेंजर सवारी डिब्बों (मेनलाइन) का निर्माण संतुलित ड्राफ्ट गियर वाले सीबीसी की व्यवस्था करके किया जाए।
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बहु-स्तरीय फायर अलार्म प्रणाली  से लैस होंगी राजधानी और तेजस 

राजधानी एक्सप्रेस और आगामी तेजस एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें जल्द ही एक आधुनिक, उच्च स्तरीय फायर अलार्म एवं प्रतिक्रिया प्रणाली से लैस होंगी। इस प्रणाली के लग जाने के बाद यदि ट्रेन में आग से जुड़ी कोई दुर्घटना होती है तो एक तय स्तर से ज्यादा धुंआ उठने पर ब्रेक अपने आप लग जाएंगे और ट्रेन रुक जाएगी।

इसके बाद प्रभावित डिब्बे में हूटर बजने लगेंगे। ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ाते हुए रेलवे उन सभी एसी डिब्बों को फायर अलार्म पूर्व चेतावनी प्रणाली (अर्ली फायर डिटेक्शन वार्निंग सिस्टम) से लैस करेगा, जिनका इस्तेमाल रात भर के सफर के लिए किया जाता है।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा सभी पावर कारों, पैंट्री कारों, विशेष सेवाओं के लोकोमोटिव को भी हाई-प्रेशर, वॉटर-मिस्ट फायर सप्रेशन सिस्टम से लैस किया जाएगा ताकि आग लगने की स्थिति में महंगे उपकरणों को बचाया जा सके।
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