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ONOE: 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' पर राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपी गई रिपोर्ट में क्या खास? जानिए इसकी 10 अहम सिफारिशें

Fri, 15 Mar 2024 09:30 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समिति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी। रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है। इसमें पिछले 191 दिनों के रिसर्च का नतीजा शामिल है। आइए जानते हैं कि समिति ने रिपोर्ट में क्या अहम सिफारिशें दी हैं।
 
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कोविंद समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को रिपोर्ट सौंपी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के सहित विभिन्न निकायों के एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति ने गुरुवार को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी। यह रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी गई। उच्च स्तरीय समिति द्वारा 10 सिफारिशें दी गई हैं। 

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रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली समिति ने राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। समिति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपी। रिपोर्ट 18,626 पन्नों की है। इसमें पिछले 191 दिनों के हितधारकों, विशेषज्ञों और अनुसंधान कार्य के साथ व्यापक परामर्श का नतीजा शामिल है।

आइए जानते हैं कि समिति ने क्या अहम सिफारिशें दी हैं-

  1. सरकार को एक साथ चुनाव करवाने के लिए कानूनी रूप से एक उचित तंत्र विकसित करना चाहिए।  
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  2. उच्चस्तरीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने के लिए दो चरणों वाले दृष्टिकोण की सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले चरण के रूप में, लोकसभा और विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं।
     
  3. दूसरे चरण में नगरपालिकाओं और पंचायतों के चुनाव हों। इन्हें पहले चरण के चुनावों के साथ इस तरह कोऑर्डिनेट किया जाए कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के सौ दिनों के भीतर इन्हें पूरा किया जाए।
     
  4. आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक के दिन राष्ट्रपति एक अधिसूचना के जरिए इस अनुच्छेद के प्रावधान को लागू कर सकते हैं। इस दिन को निर्धारित तिथि कहा जाएगा।
     
  5. इस तिथि के बाद, लोकसभा का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनावों के जरिए गठित सभी राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल केवल अगले संसदीय चुनावों तक की अवधि के लिए होगा। इसके बाद लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराए जा सकेंगे।
     
  6.  समिति की सिफारिश के अनुसार त्रिशंकु सदन या अविश्वास प्रस्ताव की स्थिति में नए सदन के गठन के लिए फिर से चुनाव कराए जा सकते हैं। 
     
  7. इस स्थिति में नए लोकसभा या विधानसभा का कार्यकाल, पहले की लोकसभा या विधानसभा की बाकी बची अवधि के लिए ही होगा।
     
  8. जब राज्य विधानसभाओं के लिए नए चुनाव होते हैं, तो ऐसी नई विधानसभाएं, जब तक कि जल्द ही भंग न हो जाएं, लोकसभा के पूर्ण कार्यकाल के अंत तक जारी रहेंगी। इन चुनावों को 'मध्यावधि चुनाव' कहा जाएगा, वहीं पांच साल के कार्यकाल के खत्म होने के बाद होने वाले चुनावों को 'आम चुनाव' कहा जाएगा। 
     
  9. निर्वाचन आयोग लोकसभा, विधानसभा, स्थानीय निकाय चुनावों के लिए राज्य चुनाव अधिकारियों के परामर्श से एकल मतदाता सूची, मतदाता पहचान पत्र तैयार करेगा।
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  10. लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स, जैसे ईवीएम मशीनों और वीवीपीएटी खरीद, मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती और अन्य व्यवस्था करने के लिए निर्वाचन आयोग पहले से योजना और अनुमान तैयार करे। वहीं नगरपालिकाओं और पंचायतों के चुनावों के लिए ये काम राज्य निर्वाचन आयोग करे।
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