दिल्ली की एक अदालत ने दिशा को पांच दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया है। वे 'फ्राइडे फॉर फ्यूचर' नाम के अभियान की संस्थापक हैं। वे माउंट कार्मल कॉलेज से अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। वोग मैग्जीन ने पर्यावरण संकट को मुख्यधारा में लाने वाले दुनिया के चार अहम अश्वेत कार्यकर्ताओं की सूची में दिशा को शामिल किया था। वे न्यूज पोर्टल सहित सोशल मीडिया पर नियमित रूप से कॉलम लिखती रहती हैं और युवाओं और किशोर कार्यकर्ताओं के लिए जलवायु से संबंधित फोरम का संचालन करती हैं।
पुलिस ने जब्त किया दिशा का लैपटॉप और मोबाइल
पुलिस अधिकारी ने कहा कि दिशा रवि का लैपटॉप और मोबाइल आगे की जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वह इस मामले से जुड़े अन्य लोगों के संपर्क में थीं या नहीं। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने गूगल और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों से 'टूलकिट' बनाने वालों से जुड़े ईमेल आईडी, डोमेन यूआरएल और कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देने को कहा था। जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने इस टूलकिट को किसानों के समर्थन में किए ट्वीट के साथ साझा किया था।
इस वजह से जलवायु कार्यकर्ता बनीं दिशा
रिपोर्ट्स की मानें तो दिशा के परिवार का घर बाढ़ की चपेट में आ गया था। दिशा ने इसके कारण तलाशने शुरू किए। साथ ही उनका कहना है कि इस तरह की त्रासदी के लिए राजनेताओं की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। जलवायु कार्यकर्ता का मानना है कि बाढ़, भारी बारिश से होने वाली तबाही के लिए सीधे तौर पर राजनेता जिम्मेदार हैं क्योंकि वे 'ढीले कदम' ही उठाते रहे हैं।
धालीवाल ने अपने सहयोगी के जरिए किया था निकिता से संपर्क
निकिता जैकब ने बंबई उच्च न्यायालय में गैर-जमानती वारंट के खिलाफ ट्रांजिट बेल की अर्जी दायर की है। कल इस मामले की सुनवाई हो सकती है। टूलकिट की साजिश को लेकर सूत्रों ने कहा, 'चार दिन पहले स्पेशल सेल की टीम निकिता जैकब के घर गई थी। उनके इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच की गई।
दिल्ली पुलिस ने कहा था कि वे उनसे पूछताछ करने के लिए फिर आएंगे, लेकिन दोबारा पहुंचने पर वह गायब थीं।' पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक मो धालीवाल ने अपने सहयोगी पुनीत के जरिए निकिता जैकब से संपर्क किया था। इसके बाद धालीवाल, निकिता, दिशा और अन्य लोगों ने गणतंत्र दिवस से पहले जूम पर बैठक की थी। इस बैठक का उद्देश्य गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के मुद्दे पर ट्विटर पर जन समर्थन जुटाना था।
शांतनु
शांतनु भी एक कार्यकर्ता हैं। उनके खिलाफ दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को गैर जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस फिलहाल उनकी तलाश कर रही है।
टूलकिट में क्या था
टूलकिट में बताया गया था किसान आंदोलन में सोशल मीडिया पर समर्थन कैसे जुटाया जाए। हैशटैग का इस्तेमाल किस तरह से किया जाए और प्रदर्शन के दौरान क्या किया जाए और क्या नहीं, सब जानकारी इसमें मौजूद थी। तीन फरवरी को कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों का समर्थंन करते हुए इस टूलकिट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था। बाद में इस टूलकिट को सोशल मीडिया ने प्रतिबंधित कर उसे डिलीट कर दिया था।