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Updates: अधीर रंजन ने डेरेक से मांगी माफी; मणिपुर में अनुच्छेद 355 लागू करने के दावों पर CM ने साधी चुप्पी

Fri, 26 Jan 2024 07:22 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता/इंफाल
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आज की बड़ी खबरें - फोटो : amar ujala graphics
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कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच जारी सियासी और जुबानी जंग के बीच पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद अधीर रंजन चौधरी ने टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन को कहे गए अपशब्द के लिए माफी मांगी है। उन्होंने ट्वीट किया, 'मैंने डेरेक ओ'ब्रायन को अनजाने में विदेशी कह दिया था, उस शब्द के लिए मैंने उनको खेद व्यक्त किया है।' इससे पहले बीते दिन सिलीगुड़ी में अधीर रंजन चौधरी ने कहा था कि डेरेक ओ'ब्रायन एक विदेशी हैं, वह बहुत ज्यादा जानते हैं। उनसे पूछ लीजिएगा।

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Biren Singh - फोटो : Social Media
दूसरी ओर मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने संघर्षग्रस्त राज्य में अनुच्छेद 355 लागू करने की खबरों पर शुक्रवार को चुप्पी साध ली। इस बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि अनुच्छेद, जो केंद्र को सरकार को बर्खास्त किए बिना राज्य की कानून और व्यवस्था का नियंत्रण संभालने का अधिकार देता है, लगाया नहीं गया है। इससे कुछ दिन पहले मणिपुर कांग्रेस अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने दावा किया था कि बीरेन सिंह ने एक बैठक के दौरान उन्हें बताया था कि राज्य में धारा 355 लागू कर दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
केरल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से 13 फरवरी तक जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की एक याचिका पर केंद्र से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका में उस पर उस पर शुद्ध उधारी पर सीमा लगाकर राज्य के वित्त को विनियमित करने के लिए अपनी विशेष, स्वायत्त और पूर्ण शक्तियों के प्रयोग में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामनी से कहा कि वह वित्तीय संकट को रोकने के लिए तत्काल आदेश के लिए राज्य द्वारा दायर एक आवेदन पर भी अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करें।
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Supreme Court - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर स्वत: संज्ञान लिया
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा पारित एक आदेश पर स्वत: संज्ञान लिया। इसमें पश्चिम बंगाल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में एमबीबीएस उम्मीदवारों के प्रवेश में कथित अनियमितताओं के एक मामले में खंडपीठ के आदेश को गलत और उपेक्षित बताया गया था। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सीबीआई जांच के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी थी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ शनिवार की विशेष सुनवाई में मामले की सुनवाई करने वाली है।
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