भाजपा नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा को पंजाब पुलिस के चंगुल से बचाने के लिए बचाव पक्ष उसी पुलिस अधिकारी का इस्तेमाल करेगी, जिसे बग्गा को गिरफ्तार करने के लिए भेजा गया था। बचाव पक्ष डीएसपी केएस संधू का ‘विवादित इतिहास’ कोर्ट को बताएगी, जिससे यह साबित किया जा सके कि बग्गा को फंसाने के लिए किस हद तक साजिश रची गई थी और उन्हें पंजाब ले जाकर प्रताड़ित किए जाने की क्या योजना थी। कथित तौर पर केएस संधू के तार ड्रग तस्करों से जुड़े हुए हैं। उन पर नाम बदलकर अपना पुराना इतिहास छिपाने की जालसाजी करने के गंभीर आरोप भी हैं।
भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने बग्गा को गिरफ्तार करने आये पुलिस अधिकारी केएस संधू पर छह मई की शाम कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि पंजाब पुलिस के डीएसपी केएस संधू ड्रग तस्करी के एक मामले में बर्खास्त कर दिए गए थे। उन्होंने 38 लाख रुपये की घूस देकर अपनी बहाली कराई और पदोन्नति पाई। एक बार बर्खास्त होने के बाद भी वे सब इंस्पेक्टर रैंक से डीएसपी रैंक तक पहुंच गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च पद पर जाने से पहले उन्होंने अपना नाम भी बदल लिया था, ताकि वे अपने आपको बचा सकें।
मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा पंजाब पुलिस के डीएसपी केएस संधू पर लगाए गए आरोप कितने सही हैं? इस बारे में सिरसा ने अमर उजाला को बताया कि केएस संधू ने एक व्यक्ति को 38 लाख रुपये देकर अपनी बहाली कराई थी। संधू ने खुद इस बाबत चंडीगढ़ के सेक्टर 11 के पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके नाम बदलने के बारे में पुलिस रिकॉर्ड को खंगाला जा सकता है, जिससे उनका सच सामने आ जाएगा।
आरोप है कि केएस संधू ने मोहाली में रहते हुए एक नेता की पिटाई भी की थी। वे नेता इस समय भगवंत मान सरकार में एक महत्त्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं। हालांकि इस समय इस नेता से संधू के बेहतर संबंध बताए जा रहे हैं। आरोप है कि उसी कनेक्शन को इस्तेमाल करते हुए केएस संधू को बग्गा मामले की जांच सौंपी गई है। सिरसा ने आरोप लगाया कि तजिंदर पाल सिंह बग्गा को गिरफ्तार करके उन्हें पंजाब की एक छिपी हुई जगह पर रखा जा सकता था, जहां उनको भयंकर तरीके से टॉर्चर किया जा सकता था। इस पूरी साजिश को संधू से ही अंजाम दिलाया जा सकता था। लिहाजा बग्गा की गिरफ्तारी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इस मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए और संधू को अपने पद से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
बग्गा पर दर्ज एफआईआर निरस्त कराने की कोशिश में कोर्ट में यह सभी दलीलें रखी जा सकती हैं। इससे बग्गा के मामले में पंजाब सरकार भी संदेह के घेरे में आ सकती है, जिसका लाभ बग्गा को मिल सकता है। फिलहाल, चूंकि बग्गा पर एक नई एफआईआर दर्ज कर उन्हें दूसरे मामले में गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है, बग्गा इस समय अंडरग्राउंड हैं और अपनी रिहाई के रास्ते तलाश रहे हैं।