पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष के दावे से सियासी पारा चढ़ गया है। टीएमसी के महासचिव पद से हटाए जाने के बाद घोष ने पार्टी के राज खोलने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव 2021 से पहले ही पार्टी को स्कूल भर्ती घोटाले के बारे में पता था। घोष का पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला यह बयान लोकसभा चुनाव के बीच आया है, इससे संसदीय चुनाव में एसएससी घोटाला एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
बता दें कि कुणाल घोष टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं। घोष ने बुधवार को भाजपा उम्मीदवार के साथ मंच साझा किया था। इस दौरान उन्होंने भाजपा उम्मीदवार की तारीफ भी की, जिसके कुछ घंटों बाद ही पार्टी ने घोष को पद से हटा दिया था।
सत्ता में आने के बाद टीएमसी ने बदला पार्थ का विभाग
कुणाल घोष ने एक इंटरव्यू में कहा, 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी जानती थी कि स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। नौकरी के बदले वसूली की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि 2021 में पार्टी के लगातार तीसरी बार सत्ता में आने के बाद और भ्रष्टाचार का पता होने के बाद पार्थ चटर्जी को उद्योग विभाग से शिक्षा मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद गई 26 हजार लोगों की नौकरी
घोष की यह टिप्पणी कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के एक सप्ताह बाद आई है, जिसमें कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में राज्य स्तरीय चयन परीक्षा-2016 (एसएलएसटी) को अमान्य करार दिया था। साथ ही एसएलएसटी के माध्यम से की गई सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद 26 हजार लोगों की नौकरी चली गई है। इस मामले में टीएमसी नेतृत्व ने कहा था कि 2022 में चटर्जी की गिरफ्तारी होने तक पार्टी को घोटाले के बारे में जानकारी नहीं थी।
ईडी ने पार्थ को जुलाई 2022 में किया था गिरफ्तार
टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी की एसएससी घोटाले में संलिप्तता पाए जाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें जुलाई 2022 में गिरफ्तार किया था। जिसके बाद टीएमसी ने भी उन्हें पार्टी से निकाल दिया और मंत्रिमंडल से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। वहीं, घोटाले में कथित संलिप्तता पाए जाने पर सीबीआई ने कई टीएमसी नेताओं, टीएमसी विधायक माणिक भट्टाचार्य और जीवन कृष्ण साह को भी गिरफ्तार किया था।