पहली बार, सिंगापुर के सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीश, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन भी शामिल रहे, शुक्रवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय की पीठों का हिस्सा बने। इस दौरान सिंगापुर के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मेनन ने ऐतिहासिक केंद्रीय न्यायालय में बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ-साथ न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी और फिरदौस पूनीवाला के साथ औपचारिक पीठ साझा की।
मराठा आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर की सुनवाई
बता दें कि इस पीठ ने महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संक्षिप्त सुनवाई की। वहीं सिंगापुर के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रमेश कन्नन ने न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति एमएम सथाये के साथ पीठ साझा की, जबकि उस देश के न्यायमूर्ति आंद्रे फ्रांसिस मनियम ने उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति केआर श्रीराम और जितेंद्र जैन के साथ औपचारिक पीठ साझा की।
बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने किया स्वागत
न्यायालय की कार्यवाही शुरू होने से पहले सिंगापुर के मुख्य न्यायाधीश मेनन का स्वागत करते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा, मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि आज हमारे बीच सिंगापुर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन हैं। वे साल 2015 में बॉम्बे में थे। मैं उनका एक बार फिर स्वागत करता हूं।
वहीं महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने बताया कि पीठ उस न्यायालय कक्ष में एकत्रित हुई थी, जहां स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के खिलाफ मुकदमा चला था और जहां उन्हें दोषी ठहराया गया था। महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने कहा, मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन सिंगापुर और भारत के बीच विचारों के सहयोग के बारे में हमारे अपने भारत के मुख्य न्यायाधीश (डी वाई चंद्रचूड़) के समान विचार रखते हैं।
जबकि मराठा आरक्षण मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रदीप संचेती ने कहा कि आरक्षण का निर्णय मनमाना और अवैध था। पीठ ने मामले की संक्षिप्त सुनवाई की। वहीं सुनवाई के बाद जाने से पहले मुख्य न्यायाधीश सुंदरेश मेनन ने झुककर न्यायालय में उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।