संसद से तीन आपराधिक विधेयकों के पारित होने पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को सराहना की है। इस दौरान उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल के कानूनों को बदलने और भारत के उद्भव के लिए उपनिवेशवाद से मुक्ति में मील का पत्थर कहा है। उन्होंने कहा कि कानूनी, पुलिस और जांच प्रणालियों को अद्यतन करने से कमजोर लोगों के लिए सुरक्षा बढ़ती है। संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी प्रतिक्रिया की सुविधा भी मिलती है।
ये तीनों बिल नए युग की शुरुआत- अमित शाह
तीन आपराधिक विधेयक - भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता विधेयक, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता विधेयक, और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक - संसद के दोनों सदनों से पारित किए गए, जो दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। बता दें संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान तीन विधेयकों को पेश किया गया था। चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि यह एक नए युग की शुरुआत है क्योंकि इन विधेयकों का उद्देश्य न्याय देना है न कि सजा देना। इससे पहले, पीएम मोदी ने भी इन विधेयकों के पारित होने की सराहना की थी और इसे भारतीय इतिहास में एक 'वाटरशेड मोमेंट' कहा था। साथ ही उन्होंने कहा था कि ये सुधार के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है।
औपनिवेशिक युग के कानून का अंत- पीएम मोदी
विधेयकों के पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 का पारित होना हमारे इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण है। ये विधेयक औपनिवेशिक युग के कानूनों के अंत का प्रतीक हैं। जनता पर केंद्रित कानूनों के साथ एक नए युग की शुरुआत होती है।