केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में भर्तियों को लेकर आए दिन प्रदर्शन होते रहते हैं। कर्मचारी संगठन भी खाली पड़े पदों को भरने के लिए सरकार पर दबाव डालते हैं। इन सबके बावजूद केंद्र सरकार के 73 मंत्रालयों और विभागों की स्थिति ऐसी है कि उनमें जितने पद स्वीकृत हैं, वे भी पूरी तरह नहीं भरे जा सके। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को छोड़कर एक भी ऐसा मंत्रालय या विभाग नहीं है, जहां पर स्वीकृत पदों की संख्या के बराबर भर्ती कर ली गई हो। इस विभाग के लिए मंजूर 21314 पदों पर उतने ही कर्मी कार्यरत हैं।
कैबिनेट सचिवालय में 359 पद स्वीकृत थे, जबकि पदस्थ संख्या 300 थी। परमाणु ऊर्जा में स्वीकृत पद 36820 और पदस्थ कर्मियों की संख्या 30639 रही है। कृषि सहकारिता में 5940 पद स्वीकृत किए गए थे। इनके मुकाबले भरे गए पदों की संख्या 3939 थी। रक्षा (सिविल) में 585476 पद थे, जबकि नियुक्तियों की संख्या 398422 रही है। विदेश मंत्रालय में 8008 पदों पर भर्ती की मंजूरी दी गई थी, लेकिन 7012 पद ही भरे जा सके।
वित्तीय सेवाओं के लिए स्वीकृत 1700 पदों में से केवल 1161 पद ही भरे गए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय में 1020631 पद स्वीकृत थे, जबकि यहां कार्यरत कर्मियों की संख्या 948266 रही है। रेलवे के लिए 1507694 पद स्वीकृत किए गए हैं, तो वहीं भरे हुए पदों की संख्या 1248325 है। ग्रामीण विकास में 515 स्वीकृत पदों के मुकाबले 385 कार्मिक ड्यूटी पर हैं। व्यय विभाग में 1023 स्वीकृत पदों में से केवल 645 पद ही भरे जा सके हैं। संसदीय कार्य में 149 पद मंजूर किए गए हैं। यहां 119 कार्मिक कार्यरत हैं।
अंतरिक्ष विभाग में 15409 स्वीकृत पदों में से 12369 पद ही भरे जा सके हैं। यूपीएससी के लिए 1828 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1278 पद भरे गए हैं। विधि और न्याय विभाग के लिए 2570 पद मंजूर किए गए थे। इनमें से 1978 पद ही भरे जा सके हैं। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन विभाग में 10844 पद स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 8483 पदों पर भर्ती हुई थी।
युवा हल्लाबोल के संयोजक अनुपम कहते हैं, केंद्र और राज्यों की भर्ती प्रक्रिया लचर रही है। आए दिन युवाओं के प्रदर्शन होते हैं। कोई परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए तो कोई रिजल्ट समय पर घोषित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करता है। कई बार तो रिजल्ट घोषित करने में इतनी देर कर दी जाती है कि उम्मीदवार तय आयुसीमा को पार कर जाते हैं। खासतौर पर, सीएपीएफ या दूसरे पुलिस संगठनों में ऐसा देखने को मिलता है। युवा हल्लाबोल ने इस मुद्दों को लेकर लंबा संघर्ष किया है।
केंद्र सरकार को मॉडल एग्जाम कोड, जैसे दस्तावेज भी सौंपे हैं। इसकी मदद से 9 माह में भर्ती का विज्ञापन, परीक्षा और रिजल्ट तक संभव हो जाता है। युवा हल्लाबोल के आंदोलन के बाद ही केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग सेक्टर में नौकरी के लिए अब एक साथ प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी। कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट आयोजित करने के लिए केंद्र सरकार ने 1517.57 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
अनुपम के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के भर्ती बोर्ड या आयोगों में अभी तक निष्पक्ष भर्ती वाली स्थिति नहीं आई है। भर्ती प्रक्रिया में बहुत से छिद्र मौजूद हैं। जैसे पेपर लीक होना या परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ाना, मार्किंग में गलतियां और कई अन्य कमियां नजर आती हैं। अगर इन्हें समय रहते बंद कर दिया जाए तो भर्ती में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
निष्पक्ष भर्ती को लेकर युवाओं का भरोसा बनने लगेगा। सरकारी कार्यालयों में लंबे समय तक जो पद खाली पड़े रहते हैं, उसका दोहरा नुकसान होता है। मंत्रालय या विभागीय कार्यप्रणाली पर असर पड़ने के अलावा जो युवा भर्ती की लाइन में लगे होते हैं, वे भी इसका नुकसान झेलते हैं।