आईएस को लेकर अब सभी राज्यों की पुलिस और साइबर विंग को सचेत किया गया है। फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे खुले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रखी जा रही है। खासतौर पर एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रडार पर हैं। ऑनलाइन हैंडलर्स का डाटा जुटाया जा रहा है। स्थानीय भाषा में आईएस ग्रंथों का अनुवाद, साजिश, मॉड्यूल तैयार करना, हथियारों, गोला-बारूद, आईईडी की तैयारी व आतंकी फंडिंग के लिए लोकल हैंडलर्स, आईएस की मदद कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इन हैंडलर तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। एनआईए के मुताबिक, 'इस्लामिक स्टेट', केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और जम्मू-कश्मीर में सबसे अधिक सक्रिय है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस्लामिक स्टेट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया/दाएश/इस्लामिक स्टेट इन खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी)/आईएसआईएस विलायत खुरासान/इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक और शाम-खुरासन (आईएसआईएस-के) जैसे संगठनों को आतंकवादी संगठन के रूप में अधिसूचित किया है। ये चरमपंथी संगठन केंद्र सरकार द्वारा जारी गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की पहली अनुसूची में शामिल हैं। एक अधिकारी बताते हैं कि अब अफगानिस्तान में तालिबान का कब्जा होने के बाद आईएस को लेकर सुरक्षा एवं जांच एजेंसियां ज्यादा सक्रिय हो गई हैं। दिसंबर तक 'आईएस' के विभिन्न मामलों में कई बड़े हैंडलर की गिरफ्तारी हो सकती है।