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SC: ‘सिर्फ अदालत में आरोपी के खिलाफ गवाही भरोसेमंद नहीं’, हत्यारोपी को बरी करते हुए सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Sun, 07 Jan 2024 05:57 AM IST
जलज मिश्रा राजीव सिन्हा, नई दिल्ली

सार

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि जब दोषसिद्धि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित हो तो परिस्थितियों की कड़ियां एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ी होनी चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थितियों में अभियोजन पक्ष के गवाह पर भरोसा नहीं किया जा सकता जब वह पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कराने के बजाय केवल मुकदमे के दौरान कोर्ट में आरोपी की संलिप्तता के बारे में बयान दे रहा हो। शीर्ष अदालत ने इसके साथ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले खिलाफ अपील करने वाले पत्नी की हत्या के आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि जब दोषसिद्धि केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित हो तो परिस्थितियों की कड़ियां एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़ी होनी चाहिए। यदि कड़ियों में किसी तरह की कोई गड़बड़ी है तो आरोपी संदेह का लाभ पाने का हकदार है। उक्त मामले में दर्शन सिंह पर आरोप था कि 1999 में रानी कौर के साथ कथित अवैध संबंधों के कारण उसने पत्नी अमरीक कौर की जहर देकर हत्या कर दी थी। दर्शन सिंह ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें निचली अदालत ने उसकी दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं, हत्या में साथ देने की सह-अभियुक्त रानी कौर को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ अपील दायर नहीं की थी।

गवाहों के बयान में दिखा था अंतर

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शीर्ष अदालत ने कहा कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और अभियोजन पक्ष के गवाहों, मृतका की बहन मेलो कौर और उनके पति गुरमेल सिंह के बयानों में अंतर दिखा था। अपीलकर्ता का दावा था कि अमरीक कौर का मेलो कौर के पति गुरमेल सिंह के साथ अवैध संबंध था और बहन को यह पता चलने से शर्मिंदा होकर उसने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। कोर्ट ने कहा कि मामले में मेलो कौर की गवाही में तकनीकी खामियां सामने आई हैं।

अचानक संदेह का कोई कारण नहीं
मेलों ने केवल पति से सुना था कि दर्शन और रानी को घटना के एक दिन पहले (18 मई, 1999 को) दर्शन के घर पर देखा गया था। कोर्ट ने कहा है, अगर वह (मेलो) जानती थी कि दर्शन और रानी के अवैध संबंध थे तो अचानक यह संदेह करने का कोई कारण नहीं बनता कि वे दोनों एक साथ मिलेंगे, जहर देंगे और हत्या कर देंगे। वहीं, अदालत ने विद्वानों के ऐसे शोधपत्रों पर भी भरोसा जताया, जो कहते हैं कि इस मामले में इस्तेमाल जहरीले पदार्थ (एल्यूमीनियम फॉस्फाइड) की प्रकृति ऐसी है कि यह धोखे से देने की संभावना नहीं है, क्योंकि इसमें लहसुन जैसी तीखी गंध होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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