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गत-फर्द और उठान के बादशाह थे पं. लच्छू महाराज

Fri, 29 Jul 2016 04:10 AM IST
अनूप ओझा/ वाराणसी
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लच्छू महाराज - फोटो : ghkh
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‘हजारों साल तक नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है/बहुत मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा...। तबले की दुनिया में ऐसा ताल गुरु पैदा होना अब मुश्किल है। इसलिए कि अब न तो वैसा रियाज रहा न बनारसबाज की परंपरा को जीने वाले लोग।
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पं. लच्छू महाराज जैसा थाप देने वाला, उन जैसा फक्ककड़ मिजाज रखने वाला न कोई था न कोई अब होगा।’ यह कहना है उनके करीबी शिष्य जाने-माने तबला वादक पं. अशोक पांडेय का। पं. लच्छू महाराज देश में तबले के ऐसे इकलौते कलाकार थे, जिनके पास पांच हजार से अधिक गत-फर्द का अनूठा संग्रह था। वह गत-फर्द और उठान के सर्वश्रेष्ठ कलाकार थे।

वह बढ़ैया की उठान के अलावा गत, फर्द बहुत खूबसूरत बजाते थे। एकल तबला वादन में उन्हें महारत हासिल थी। पं. अशोक पांडेय कहते हैं कि धिर धिर तिटकत... का बोल जो वह बजाते थे, उसे कोई दूसरा कलाकार कॉपी नहीं कर सका। ना धिं धिं ना... के बादशाह कहे जाने वाले पं. अनोखेलाल मिश्र के बाद खड़ी उंगली के बोल का जादू सिर्फ लच्छू महाराज के पास था।
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ठुमरी गायक पं. छन्नूलाल मिश्र कहते हैं कि उनकी उठान में जो जान थी, वह किसी दूसरे कलाकार में नहीं थी। तबला वादक डॉ. प्रवीण उद्धव बताते हैं कि वह तबले के चारों घराने अजराड़ा घराना, बनारस घराना, फर्रूखाबाद घराना और लखनऊ घराने की बोल और विशेषता पर समान रूप से अधिकार रखने वाले कलाकार थे।

71 वर्ष की उम्र में भी उनके पास रियाज था और तैयारी भी। वह बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादकों में पं. अनोखे लाल, पद्मभूषण पं. सामता प्रसाद गोदई महाराज, पद्मविभूषण पं. किशन महाराज की परंपरा के आखिरी कलाकार थे, जिनकी उंगलियों के जादू का असर भी था और संगीत जगत में दबदबा भी।
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