राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
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बीते 31 अक्तूूबर को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और अशोक गहलोत सरकार के बीच 14 बिंदुओं पर सहमति बनी है। हालांकि, संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला इस वार्ता में शामिल नहीं हुए थे। वार्ता में गुर्जर नेता हिम्मत सिंह के गुट के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस बैठक में सरकार गुर्जरों को सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण देने समेत कई प्रमुख मांगों पर राजी हो गई।
मगर, 14 बिंदुओं पर जो सहमति बनी है, उसमें एक अहम बात ये भी है कि सरकार ने आरक्षण से संबंधित प्रावधान को नौवीं सूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की बात कही है। समझौते में कहा गया है कि राज्य सरकार द्वारा अति पिछड़ा वर्ग हेतु आरक्षण से संबंधित प्रावधान को नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को 22 फरवरी, 2019 और 21 अक्तूबर 2020 को लिखा गया है। इस बारे में एक बार फिर केंद्र सरकार को लिखा जाएगा। गुर्जरों की नाराजगी के पीछे असली वजह भी यही बताई जा रही है।
...तो मराठा समेत अन्य समुदायों के आरक्षण का मुद्दा भी गरमाएगा
गुर्जर बैकलॉग में पांच फीसदी विशेष आरक्षण की मांग कर रहे हैं तो दूसरी तरफ जिस तरह से मराठा आरक्षण पर हाईकोर्ट का हथौड़ा चला है उसे देखते हुए केंद्र सरकार से गुर्जर आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने की मांग की जा रही है। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला गुट का विरोध भी इन्हीं बातों को लेकर है। बैंसला ने समझौते को सौदा बताया है। ऐसे में केंद्र सरकार अगर गुर्जरों के लिए फैसला करेगी तो फिर मराठा समेत अन्य जातियों के आरक्षण का मुद्दा भी गरमा जाएगा।