पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से आए दिन स्पष्टीकरण देने के लिए डीओपीटी के पास पत्र आते हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक भी यह मामला पहुंच चुका है। राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में बताया, 22 दिसंबर 2003 की अधिसूचना के विशिष्ट उपबंधों को ध्यान में रखते हुए रिक्तियों के लिए विज्ञापन की तारीख या उन रिक्तियों के सापेक्ष चयन के लिए परीक्षा की तारीख को पुरानी पेंशन योजना या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत कवर किए जाने की पात्रता निर्धारित करने के लिए सुसंगत नहीं माना जाता है। ऐसे उम्मीदवार जिनकी भर्ती प्रक्रिया 31 दिसंबर 2003 को या उससे पहले पूरी हो चुकी थी। पूर्व घोषित परिणामों में उम्मीदवारों को सफल घोषित किया गया था। किसी वजह से उनकी ज्वाइनिंग प्रक्रिया एक जनवरी 2004 को या इसके बाद संभव हो सकी है, उन्हें राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत कवर किया जाता है। ऐसे उम्मीदवारों को अब केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमावली, 1972 के अधीन कवर किए जाने का एक विकल्प दिया जा सकता है।
कुछ विशिष्ट अदालती मामले जैसे डब्ल्यूपीसी (सी) संख्या 3834/2013 शीर्षक परमानंद यादव बनाम भारत संघ और डब्ल्यूपीसी (सी) संख्या 2810/2016 शीर्षक राजेंद्र सिंह बनाम भारत संघ, जहां दिनांक एक जनवरी 2004 से पूर्व उम्मीदवारों को चयन कर लिया गया था। किन्हीं कारणों से सरकारी सेवा में उनकी नियुक्ति एक जनवरी 2004 को या उसके बाद की जा सकी। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश पर याचिकाकर्ताओं को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की अनुज्ञा दी गई। अब केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों में एक जैसी व्यवस्था लागू कर दी गई है। पुरानी पेंशन और एनपीएस को लेकर कोई गतिरोध नहीं रहेगा। बहुत सामान्य तरीके से बता दिया गया है कि पहली जनवरी 2004 के बाद केवल उन्हीं उम्मीदवारों को पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प मिलेगा, जिनकी भर्ती की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2003 से पहले पूरी कर ली गई थी। केवल उनकी ज्वाइनिंग 2004 में हुई थी। इसमें लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल आदि, भर्ती प्रक्रिया के सभी चरण शामिल हैं। ऐसे उम्मीदवारों को ओपीएस का हिस्सा बनाया जा सकता है।