2017 में यासीन मलिक के खिलाफ NIA ने टेरर फंडिंग का मामला दर्ज किया। इसके बाद से पटियाला कोर्ट में इस मामले की लगातार सुनवाई हो रही थी। कोर्ट में NIA ने सारे सबूत पेश किए। बताया कि देश में आतंकी घटनाओं को बढ़ावा देने के लिए यासीन मलिक के पास पाकिस्तान समेत दुनिया के कई देशों से पैसा आता था। उन पैसों के जरिए देश में कई बड़ी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया गया।
NIA ने यासीन पर लगे एक-एक आरोपों के लिए सबूत पेश किए। जिसके बाद यासीन मलिक को अपने गुनाह कबूल करने पड़े। इसके बाद NIA ने यासीन मलिक को फांसी की सजा देने की मांग की।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ यासीन मलिक
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यासीन के वकील फरहान ने एक इंटरव्यू में बताया कि NIA की मांग के बाद कोर्ट ने यासीन मलिक को बोलने के लिए कहा। तब यासीन ने कहा, 'मैं पिछले 28 साल से अहिंसा की राजनीति कर रहा हूं। इन 28 सालों में मैं किसी भी हिंसात्मक घटना में शामिल नहीं हुआ। NIA कोई भी एक ऐसी घटना बता दे, जिसमें मैं शामिल रहा हूं? मैंने देश के सात प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। गुजराल से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक इसमें शामिल हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने ही मुझे पासपोर्ट दिया था। इसके बाद मैं हार्वर्ड गया। मैं हार्वर्ड में भी भारत की तरफ से गया था। वहां मैंने लेक्चर दिया। अगर हिंसा करना ही मेरा काम होता तो मैं हार्वर्ड क्यों जाता? मेरी हमेशा से कोशिश रही कि मैं देश के प्रधानमंत्रियों के साथ मिलकर हालात को सही कर सकूं। मैं महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चल रहा हूं।'
आगे यासीन ने कहा, 'सजा पर मैं कुछ नहीं बोलूंगा। जब भी मुझे कहा गया मैंने आत्मसमर्पण किया। अब आपको (कोर्ट) जो भी सजा देनी है, दे दीजिए... मैं कुछ नहीं बोलूंगा। लेकिन ईमानदारी से दीजिएगा।'
कोर्ट ने 19 मई को यासीन मलिक को आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने का दोषी ठहराया था। इस मामले में NIA ने 2017 में एफआईआर दर्ज की थी। एक दर्जन से अधिक लोग आरोपी बनाए गए थे। 18 जनवरी 2018 को NIA ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। NIA ने कोर्ट में कहा था, 'लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, जेकेएलएफ, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने कश्मीर और देश में बड़े पैमाने पर हमले किए थे।' कोर्ट में यासीन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल भी लिया था। उसने कहा था कि वह इसे चुनौती नहीं देगा।