राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने तेलंगाना के मेदिगड्डा बैराज को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त पाया है। प्राधिकरण का मानना है कि जब तक बैराज का पूरी तरह से पुनरुद्धार नहीं किया जाता, बांध का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बता दें कि एनडीएसए ने बैराज के खंभों के डूबने के कारणों की जांच पूरी कर ली है।
एनडीएसए के सदस्य (आपदा और लचीलापन) के नेतृत्व में छह सदस्यीय समिति ने मेडीगड्डा बैराज के घाटों के डूबने के कारणों की गहन जांच करने के लिए 23 से 25 अक्टूबर तक साइट का दौरा किया। तेलंगाना के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में, एनडीएसए सदस्य संजय कुमार सिब्बल ने कहा कि वर्तमान स्थिति में बैराज "पूरी तरह से पुनरुद्धार होने तक बेकार है"।
समिति ने 23 अक्टूबर को तेलंगाना सिंचाई और सीएडी विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ (सामान्य) के साथ चर्चा की। 24 अक्टूबर को मेदिगड्डा बैराज का निरीक्षण किया और 25 अक्टूबर को हैदराबाद में एल एंड टी इंफ्रा लिमिटेड सहित तमाम हितधारकों के साथ अंतिम चर्चा की।
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की सरकार को लिखे गए पत्र में NDSA ने कहा है कि सिंचाई और कमान क्षेत्र विकास (सीएडी) विभाग ने बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के तहत जरूरी डेटा और इनपुट प्रदान नहीं मिले हैं। एनडीएसए ने कहा कि खंभों के डूबने का कारण योजना, डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और संचालन और रखरखाव के मुद्दों सहित कई समस्याओं का संयोजन था।
तेलंगाना राज्य के अधिकारियों से समिति के निष्कर्षों को गंभीरता से लेने और स्थिति को सुधारने के लिए उपाय लागू करने का आग्रह किया गया। विफलता के सटीक कारणों को निर्धारित करने के लिए एक विस्तृत जांच करने की मांग की गई। साथ ही सरकार को एनडीएसए को परिणामों और प्रस्तावित पुनर्वास उपायों के बारे में सूचित भी करना होगा।
केंद्रीय मंत्री और तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष जी किशन रेड्डी ने शुक्रवार को कालेश्वरम परियोजना के मेदिगड्डा बैराज को हुए कथित नुकसान पर व्यापक जांच की मांग की। हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए, रेड्डी ने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है, तो वह इस मुद्दे की गहन जांच कराएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी चूक के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
दुनिया की सबसे बड़ी मल्टी-स्टेज लिफ्ट सिंचाई परियोजना के रूप में प्रचारित, कालेश्वरम के तहत मेदिगड्डा बैराज के खंभों में दरारें आ गई हैं। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के अनुसार, "कालेश्वरम के मेदिगड्डा (लक्ष्मी) बैराज के छठे से आठवें ब्लॉक के 15 से 20 तक के खंभों में दरारें आ गई हैं। कथित तौर पर परियोजना 21 अक्टूबर की रात को डूब गई थी।"