swarm of 75 drones destroying a variety of simulated targets in explosive kamikaze attacks for the first time. on Indian Army Day
- फोटो : Amar Ujala
ड्रोन फाइटिंग तकनीक में भी टक्कर देने की तैयारी
ड्रोन (मानव रहित विमान) निगरानी और युद्धपद्धति में भी भारतीय वैज्ञानिक टक्कर देने की तैयारी में हैं। एरोस्पेस वॉरफेयर स्टडीज के सूत्रों का कहना है कि आने वाले कुछ सालों में काफी कुछ तेजी से बदलने वाला है। सूत्र का कहना है कि पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर चौकसी एक बड़ी चुनौती बनी है। वैज्ञानिक इसे भी ध्यान में रखकर काफी कुछ कर रहे हैं।
15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस के अवसर पर सशस्त्र सेना ने ड्रोन तकनीक की एक झलक दिखाई थी। सूत्र का कहना था यह प्रदर्शनी केवल एक झांकी भर थी। वह दावे के साथ कह सकते हैं कि आने वाले सालों में भारत इस क्षेत्र में काफी बड़ी उपलब्धि हासिल कर लेगा। कई तरह के ड्रोन पर काम चल रहा है। सिविलियन ड्रोन पर भी काफी चल रहा है और आंतरिक सुरक्षा से लेकर यातायात, प्राकृतिक आपदा समेत हर क्षेत्र में इसका उपयोग किया जाएगा।
अभी अमेरिका, चीन और इस्राइल हैं काफी आगे
कर्नल (रिटा.) एके शर्मा मॉडर्न वॉरफेयर पर काफी काम कर रहे हैं। कर्नल का कहना है कि अमेरिका, इस्राइल, रूस और यूरोपीय देशों की रक्षा कंपनियां इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रही हैं। इसके साथ-साथ चीन ने भी बड़ी सफलता हासिल की है। ड्रोन तकनीक के मामले में चीन की प्रौद्योगिकी भी काफी उन्नत है। शर्मा के मुताबिक अमेरिकी ड्रोन दुश्मन को ठिकाने लगाने में कई बड़े आपरेशन को अंजाम दे चुके हैं। इसके साथ-साथ चीन ने भी फाइटिंग कैपेबिलिटी ड्रोन, सिविलियन ड्रोन में अपनी क्षमता को काफी बढ़ा लिया है। सिविलियन ड्रोन में उसने काफी बड़ी हिस्सेदारी भी हासिल कर ली है।