आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में कथित तौर पर जानवरों की चर्बी मिलने का मामला गहराता जा रहा है। देशभर में इस घटना की निंदा की जा रही है। इस मामले को लेकर आंध्र प्रदेश के मंत्री और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) नेता नारा लोकेश ने पिछली वाईएसआरसीपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने टीटीडी (तिरुमला तिरुपति देवस्थानम) को केवल और अपने साथियों के कल्याण के लिए बनाए रखा था।
गौरतलब है, गुजरात में केंद्र सरकार के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का पशुधन व खाद्य विश्लेषण स्टडी सेंटर की लैब में जो जांच की गई उसमें पाया गया कि लड्डुओं में जानवरों की चर्बी मिलाई गई थी। इस पर सियासी विवाद गहराता जा रहा है।
अगर भगवान के नाम का दुरुपयोग होगा तो...
तिरुपति लड्डू विवाद पर टीडीपी नेता नारा लोकेश ने कहा, 'पिछली सरकार ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को केवल और अपने साथियों के कल्याण के लिए बनाए रखा था। हमने कहा था कि अगर भगवान के नाम का दुरुपयोग होगा तो ये विनाश लाएगा। 2019 से 2024 तक हमारे गठबंधन (जनसेना तेलुगु देसम) ने कई बार तब की वाईएसआरसीपी सरकार की निंदा की थी।'
उन्होंने कहा कि हमने लैब रिपोर्टों के आधार पर जानवरों की चर्बी उपयोग करके घटिया तिरुमाला लड्डू बनाने का पर्दाफाश किया है। तेलगु देशम पार्टी के नेता ने आगे कहा, 'पिछली सरकार ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की प्रतिष्ठता को खराब किया है। हमने पिछली गलतियों को सुधारने के लिए नया ईओ नियुक्त किया है। सीएम चंद्रबाबू नायडू ने प्रसाद की गुणवत्ता को बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। हमने राज्य में पहले भी बहुत से सीएम देखे, लेकिन ऐसी सरकार नहीं देखी। पिछली सरकार ने टीटीडी को सिर्फ अपने कल्याण के लिए बनाया था। एनडीए सरकार टीटीडी की प्रतिष्ठा वापस लाने के लिए नए सुधार करेगी।'
जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ कोर्ट जाएगी भाजपा
इससे पहले, टीटीडी बोर्ड सदस्य और भाजपा नेता भानुप्रकाश रेड्डी ने श्री वेंकेटेश्वरा मंदिर में तिरुपति प्रसादम के लड्डुओं में जानवरों की चर्बी मिलाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि वे पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगे। पिछली सरकार का नेतृत्व सीएम जगन मोहन रेड्डी कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि 2019 से 2024 तक जगनमोहन रेड्डी की सरकार में प्रसाद के लड्डू बनाने के लिए जिस घी का इस्तेमाल होता था वह गाय का शुद्ध घी नहीं था बल्कि मिलावटी थी। उन्होंने कहा कि बालाजी के दर्शन के बाद श्रद्धालु लड्डू प्रसाद लेते हैं। जगनमोहन रेड्डी की सरकार के दौरान रोज लड्डू बनाने के लिए 14 टन घी का इस्तेमाल होता था। दुर्भाग्य से यह मिलावटी था। रिपोर्ट में पता चला है कि इसमें जानवरों की चर्बी मिलाई गई थी।
सीएम नायडू ने किया बड़ा दावा
बता दें कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को बड़ा दावा किया था जिसपर सियासत गर्म हो गई है। उन्होंने कहा था कि तिरुपति के लड्डुओं में जानवरों की चर्बी मिलाकर घृणित राजनीति की गई है। उन्होंने कहा कि पिछली वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार ने तिरुपति में श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर को भी नहीं बख्शा और लड्डू बनाने के लिए घटिया सामग्री और पशु चर्बी का इस्तेमाल किया।
वहीं टीडीबी के प्रवक्ता अनम वेंकट रमण ने कहा कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा उपलब्ध कराए गए घी के नमूनों में गुजरात स्थित पशुधन प्रयोगशाला द्वारा मिलावट की पुष्टि की गई है। उन्होंने कथित प्रयोगशाला रिपोर्ट दिखाई, जिसमें दिए गए घी के नमूने में 'पशु की चर्बी' और मछली के तेल की मौजूदगी का भी दावा किया गया है। नमूने लेने की तारीख नौ जुलाई, 2024 थी और प्रयोगशाला रिपोर्ट 16 जुलाई की थी।
क्या तिरुपति मंदिर प्रसाद विवाद
आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ तेलुगूदेशम पार्टी ने बीते दिनों तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद के तौर पर मिलने वाले लड्डू में जानवर की चर्बी मिलाए जाने का दावा किया गया था। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसका ठीकरा कुछ महीने पहले तक सत्ता संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन की पार्टी वाईएसआरसीपी (YSRCP) पर फोड़ा है। उन्होंने दावा किया है कि YSRCP की सत्ता के दौरान ही तिरुपति मंदिर में मिलने वाला लड्डू का प्रसाद उस घी से बनाया गया, जिसमें जानवर की चर्बी मौजूद थी। इस दावे की पुष्टि लैब रिपोर्ट के आने के बाद हो गई। अब मामला राजनीतिक रूप से गहराता जा रहा है।