कोरोना महामारी के कारण पिछले साल हुए लॉकडाउन के कारण कृषि उत्पादों की आपूर्ति भी लड़खड़ाई। नतीजतन महिलाओं को प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिला है। लॉकडाउन से महिलाओं का पोषण अधिक प्रभावित हुआ है।
टाटा कॉर्नेल इंस्टीट्यूट फॉर एग्रीकल्चर एंड न्यूट्रिशियन (टीसीआई) नई दिल्ली ने अपने अध्ययन में पाया है कि महिलाओं के पोषण में कमी का कारण खाद्य पदार्थ जैसे मीट, अंडा, सब्जी, फल इत्यादि की खपत कम होने के कारण हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार ये सभी खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं लेकिन इनकी उपलब्धता न होने के कारण महिलाओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा।
इकोनॉमिया-पॉलिटिका जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार लॉकडाउन में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और वितरण पर कोई प्रतिबंध नहीं था। इसके बावजूद 2019 की तुलना में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति लड़खड़ाई है।
महामारी के कारण हालात अधिक खराब
टीसीआई की रिसर्च अर्थशास्त्री सौम्या गुप्ता बताती हैं कि कोरोना महामारी से पहले भी महिलाओं को पोषक तत्वों की कमी से जूझना पड़ता था, लेकिन महामारी के कारण हालात अधिक खराब हो गए। शोध में शामिल टीसीआई के निदेशक प्रभु पिंगाली, सहायक निदेशक मैथ्यू अब्रामहम और कंसलटेंट पायल सेठ ने उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में राज्य और जिला स्तरीय पर अध्ययन के बाद ये दावा किया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के बंद होने से मुश्किल
शोधकर्ताओं की टीम ने 155 घरों का सर्वेक्षण किया। इसमें पता चला कि लॉकडाउन के कारण 72 फीसदी घरेलू महिलाओं का आंगनबाड़ी से संपर्क टूट गया। साथ ही लॉकडाउन के दौरान खाद्य पदार्थों की बढ़ी कीमत भी महिलाओं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ी है। अध्ययन में शामिला 90 फीसदी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कम खाना खाया वहीं 95 फीसदी ने बताया कि उन्हें बहुत कम प्रकार के खाद्य पदार्थ मिले।
लॉकडाउन में पतली दाल खाना मजबूरी थी
सौम्या गुप्ता बताती हैं कि पोषक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता न होने से महिलाओं के साथ उनके छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है। महिलाओं ने बताया कि लॉकडाउन में उन्होंने पतली दान बनानी शुरू की या दाल खाना कम कर दिया। फल और अन्य विटामिन-ए युक्त पदार्थों को खाने में भी 42 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। पोषक तत्वों की कमी छोटे बच्चों के लिए कुपोषण का कारण बन सकती है।