अब एक बार फिर अफगानिस्तान में तालिबानियों का राज है। लेकिन तालिबानियों के दिल में आज भी इस बात की कसक है कि वह पहले मिली सत्ता में भी पंजशीर घाटी पर कब्जा नहीं कर पाए और ना दोबारा मिली सत्ता में पंजशीर घाटी पर कब्जा नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल पहली सत्ता में लड़ाई नॉर्दन एलायंस के अहमद शाह मसूद ने ली तो इस बार उनके बेटे अहमद मसूद तालिबानियों को ललकार कर पंजशीर घाटी में घुसने नहीं दे रहे हैं। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ और मध्य एशिया में अपनी सेवाएं दे चुके कर्नल वीके शुक्ला कहते हैं कि तालिबानियों के लिए हर साल नौ सितंबर कहर बनकर टूटता है। क्योंकि नौ सितंबर को ही उनके सबसे बड़े नेता अहमद शाह मसूद तालिबानी और अलकायदा ने मिलकर हत्या कर दी थी।
उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने अहमद शाह मसूद की पुण्यतिथि को 'मसूद दिवस' के नाम से मनाने की नेशनल हॉलिडे घोषित कर दिया था। बस तभी से इसी दिन पंजशीर घाटी में नॉर्दन एलायंस के लड़ाके तालिबानियों के लिए न सिर्फ काल बन जाते हैं बल्कि उनके आतंकी ठिकानों को पूरे अफगानिस्तान में सबसे ज्यादा सलाह भी करते हैं। कर्नल शुक्ला कहते हैं या सिलसिला बीते कई सालों से चलता चला रहा है कि नौ सितंबर को मसूद के लड़ाके तालिबानियों को चुन-चुन कर मारते हैं। इस बार तो हालात बहुत ज्यादा बदले हुए हैं और तालिबानी पंजशीर घाटी में दाखिल होने के लिए बेचैन है। लेकिन नॉर्दन एलायंस के सबसे बड़े नेता अहमद मसूद के नेतृत्व में तालिबानियों को खदेड़ रहे हैं।
कर्नल शुक्ला कहते हैं तालिबानियों को इस बार फिर इस बात का डर सता रहा है कि नौ सितंबर आने वाली है। नॉर्दन एलायंस के पास पहले से ही तालिबानियों से मुकाबला करने के लिए भारी मात्रा में न सिर्फ हथियारों का जखीरा है बल्कि गोला बारूद का भंडार भरा हुआ है। पंजशीर घाटी के नॉर्दन एलायंस में कभी अहमद मसूद के पिता अहमद शाह मसूद के लिए अपनी जान निछावर करने वाले लड़ाके अब उनके बेटे अहमद मसूद के लिए अपनी जान की बाजी लगाकर तालिबानियों से जंग लड़ रहे हैं। विदेश में पढ़ाई करके वापस आए अहमद मसूद भी अपने पिता की तर्ज पर अपनी घाटी को न सिर्फ बचा रहे हैं बल्कि अफगानिस्तान में तालिबानियों की सत्ता को ललकार रहे हैं।
पंजशीर घाटी में नेशनल रजिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान के प्रवक्ता फहीम दस्ती ने कहा तालिबान सिर्फ अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि रूस के लिए भी बहुत बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा कि रूस के लिए सबसे बड़ा खतरा होने के बावजूद भी रूस तालिबानियों का समर्थन कर रहा है जो सबसे खतरनाक है। अब तालिबानियों के पास अमेरिका के भेजे गए सभी हथियार हैं जो अमेरिका के जाने के बाद भी अफगानिस्तान में ही रह गए।