अमेरिका ने अफगानिस्तान के लोगों को अपने वजूद के लिए लड़ने की सलाह दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की यह सलाह अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा कंधार, कुंदुज समेत 10 प्रांतों पर कब्जा कर लेने के बाद आई है। तालिबान ने दसवें प्रांत के रूप में गजनी पर कब्जा कर लिया है और इसकी काबुल से दूरी महज 150 किमी की है। इस तरह से नॉदर्न हिस्से पर करीब-करीब तालिबान का नियंत्रण हो चुका है। ऐसे समय में अफगानिस्तान में वहां के सेनाध्यक्ष जनरल वली मोहम्मद अहमदजई की जगह नये सेनाध्यक्ष के तौर पर जनरल हिबैत्तुलाह अलीजाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जनरल अलीजाई इससे पहले अभी तक स्पेशल ऑपरेशन कोर के सैन्य कमांडर रहे हैं। लेकिन अफगानिस्तान के हालात पर नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि वहां की स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची इस बारे में केवल इतना कहते हैं कि भारत अफगानिस्तान के हालात पर संवेदनशीलता के साथ नजर बनाए हुए हैं। तालिबान की कोशिशों को देखते हुए भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लगातार प्रयास कर रहा है। अरिंदम बागची यह भी कहते हैं कि हम आसपास के देशों, अफगानिस्तान की सरकार और लोगों के संपर्क में भी हैं। अफगानिस्तान को लेकर विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह लगातार सक्रिय हैं।
अफगानिस्तान की फौज के पास न तो संसाधन हैं और न हथियार
करीब छह महीने पहले अफगानिस्तान से लौटे सूत्र की मानें तो उन्हें इस तरह के हालात पैदा होने का अंदाजा था। सूत्र का कहना है कि अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगान सेना के पास चुनौतियां बढ़ गई हैं। उनके पास न तो पर्याप्त संख्या में गुणवत्ता के हथियार, गोला बारूद और हवाई-हमले की क्षमता है और न ही जरूरी स्तर का प्रशिक्षण। बताते हैं सैन्य बलों की तनख्वाह आदि की भी समस्या है। सूत्र का कहना है कि उनके पास इसकी जानकारी है कि जैसे ही तालिबान अफगानिस्तान के किसी ठिकाने को निशाना बनाना शुरू करता है, वहां के सुरक्षा बल थोड़े समय बाद समर्पण कर दे रहे हैं। उनके हथियार और संसाधन तालिबान के पास आ जाते हैं और इससे उन्हें ताकत बढ़ाने में सहायता मिल जाती है। इसलिए यह कहना मुश्किल है कि सेनाध्यक्ष के बदल जाने से वहां के हालात में कोई अमूलचूल परिवर्तन हो पाएगा। विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी एसके शर्मा कहते हैं कि जिस तरह के हालात बनते जा रहे हैं, मुझे लग रहा है कि जल्द ही वहां के नेता दूसरे देशो में शरण लेना शुरू कर देंगे।