गुजरात की एक फार्मा कंपनी के कफ सिरप और एंटी एलर्जी सिरप में जहरीले रासायनिक तत्व मिले हैं। यह खुलासा एक सरकारी रिपोर्ट में हुआ है। गुजरात के खाद्य एवं औषधि नियंत्रण प्रशासन के आयुक्त एचजी कोशिया ने बताया कि बीते माह नॉरिस मेडिसिन्स लिमिटेड (Norris Medicines Limited) की फैक्टरी में निरीक्षण के दौरान दवाएं जहरीली पाई गईं। उन्होंने कहा कि कंपनी को एक महीने पहले ही अंकलेश्वर संयंत्र में दवाइयों का उत्पादन बंद करने के लिए कहा गया था।
उन्होंने कहा, कंपनी अच्छी विनिर्माण प्रथाओं के अनुपालन मानकों पर बुरी तरह विफल रही। वहां पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं थी। एयर-हैंडलिंग इकाई भी ठीक नहीं थी। सार्वजनिक स्वास्थ्य के व्यापक हित में हमने इकाई को उत्पादन बंद करने का आदेश दिया।
हालांकि इस मामले में फार्मा कंपनी ने कोई टिप्पणी नहीं की है। सीडीएससीओ प्रयोगशाला में परीक्षण के अनुसार, नॉरिस कंपनी के कफ सिरप ट्रिमैक्स एक्सपेक्टोरेंट में 0.118 फीसदी एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) था, जबकि एलर्जी दवा सिलप्रो प्लस सिरप में 0.171 फीसदी ईजी और 0.243 फीसदी डायथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) पाया गया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों के आधार पर सुरक्षित सीमा 0.10 फीसदी से अधिक नहीं है। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या नॉरिस दवाओं को वापस ले लिया या इनके सेवन से किसी को नुकसान हुआ है? यह दोनों दवाएं फिलहाल ऑनलाइन फॉर्मेसी पर सूचीबद्ध हैं।
कोल्ड आउट सिरप भी दूषित
इसके अलावा सीडीएससीओ को तमिलनाडु की कंपनी फोर्ट्स (इंडिया) लेबोरेटरीज द्वारा निर्मित कोल्ड आउट सिरप के तीन बैच भी डीईजी और ईजी से दूषित मिले हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि इराक में बेचे जाने वाले कोल्ड आउट के एक बैच में डीईजी और ईजी का अस्वीकार्य स्तर था। हालांकि फोर्ट्स कंपनी ने इस संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है। सरकार समर्थित फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के अध्यक्ष एसवी वीरमणि ने बताया कि कोल्ड आउट के प्रतिधारण नमूनों के विश्लेषण में किसी भी तरह का विषाक्त पदार्थ नहीं मिला है।
48 दवाओं के नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं
बता दें, एथिलीन ग्लाइकॉल और डायथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित सिरप के सेवन के कारण कथित तौर गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में बच्चों की मौतें हुई थीं। इसके बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने अगस्त में कुल 1,166 नमूनों का परीक्षण किया था। इनमें 48 दवाओं के नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं मिलने के बाद उन्हें 'नकली' घोषित किया गया था। जिसमें ये तीनों दवाएं भी शामिल हैं।