स्वच्छ सर्वेक्षण में स्वच्छ राज्यों की श्रेणी में छत्तीसगढ़ को पहले पायदान पर रहा। वहीं, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश को क्रमश: दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। दोनों ही राज्यों में 100 से ज्यादा शहरी स्थानीय निकाय हैं। वहीं, 100 से कम शहरी स्थानीय निकाय वाले राज्यों की श्रेणी में झारखंड पहले पायदान पर रहा तो इसके बाद हरियाणा और गोवा रहे हैं।
राज्यों को पुरस्कार देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले, महात्मा गांधी ने कहा था कि स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और उनकी इसी बात को ध्यान में रखते हुए पीएम ने स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता पुरस्कार विजेता शहरों की अच्छी प्रथाओं व चलन को अपनाया जाना चाहिए। आवास व शहरी विकास मंत्रालय के अनुसार, स्वच्छ सर्वेक्षण में राष्ट्रीय स्तर पर 28 दिनों में 4,320 शहरों में 4.2 करोड़ लोगों की राय ली गई।
नई दिल्ली नगरपालिका परिषद प्रथम
एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में महाराष्ट्र के विटा शहर को प्रथम पुरस्कार मिला है। इसी प्रकार एक से तीन लाख आबादी वाले छोटे स्वच्छ शहरों में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने प्रथम स्थान हासिल किया।
होशंगाबाद तेजी से उभरता छोटा शहर
नागरिकों की राय में होशंगाबाद तेजी से उभरता छोटा शहर और तिरुपति श्रेष्ठ छोटे शहर के रूप में सामने आया है। इसके अलावा, तीन से दस लाख आबादी की श्रेणी में नोएडा देश में ‘स्वच्छ मध्यम शहर’ के रूप उभरा है।
नवी मुंबई को मिले दो खिताब
नवी मुंबई ने ‘सफाई मित्र सुरक्षा चैलेंज’ में पहला पुरस्कार अपने नाम करने के साथ ही दस से 40 लाख आबादी वाला ‘सबसे स्वच्छ बड़ा शहर’ होने का खिताब भी पाया है। छावनी बोर्ड की श्रेणी में अहमदाबाद सबसे स्वच्छ शहर रहा। इसके बाद मेरठ और दिल्ली ने अपना स्थान बनाया।
कचरा प्रबंधन से करोड़ों बना रहा इंदौर, दूसरे शहरों के लिए नजीर
स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार पांचवीं बार अव्वल रहा इंदौर अपने समुचित कचरा प्रबंधन से मोटी कमाई भी कर रहा है, जिसे दूसरे शहर भी अपना सकते हैं। एक अधिकारी ने बताया, इंदौर नगर निगम (आईएमसी) कचरे को बायो-सीएनजी जैसे उत्पाद में बदलने वाले प्लांटों से सालाना आठ करोड़ कमा रहा है। स्वच्छ भारत अभियान पर निगम के सलाहकार असद वारसी के मुताबिक, शहर में 550 टन क्षमता वाले बायो-सीएनजी प्लांट जल्द ही लगाया जाएगा, जिससे निकाय की कमाई 10 करोड़ हो जाएगी।
गर्भावस्था में भी जुटी रहीं निगम आयुक्त
इंदौर को पांचवीं दफा सबसे स्वच्छ शहर का तमगा दिलाने के पीछे शहर की निगम आयुक्त प्रतिभा पाल का बड़ा हाथ रहा है। बताया जा रहा है कि नौ माह तक पूरी गर्भावस्था के बावजूद उन्होंने शहर की स्वच्छता का जिम्मा मुस्तैदी से संभाले रखा। वहीं, प्रसव के 11 दिन बाद ही फिर से काम पर लौट आईं। उन्होंने कहा, गर्भावस्था के दौरान काम करना मुश्किल जरूर था, लेकिन टीम के समर्पण ने कठोर श्रम के लिए प्रेरित किया।