- देश में कोरोना वायरस से तीन लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसके बावजूद ज्यादातर मृतकों के मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण लंग्स इन्फेक्शन, हर्ट प्रॉब्लम या फिर कोई अन्य गंभीर बीमारी दिया गया है। ऐसे पीड़ित परिवार मुआवजे के हकदार नहीं हो सकते हैं।
- सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार से कहा कि वह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की गाइडलाइंस पेश करे, जिसमें कोविड से मौत के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान है। इसके लिए एक यूनिफर्म पॉलिसी होनी चाहिए।
क्या कहती है आईसीएमआर की गाइडलाइंस?
- आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफोर्मेटिक्स एंड रिसर्च (एनसीडीआईआर) ने पिछले साल कोविड-19 से होने वाली मौतों के संबंध में गाइडलांइस जारी की थी।
- गाइडलाइंस के मुताबिक, कोरोना संक्रमित होने के दौरान मरीज को श्वसन संबंधी, हार्ट अटैक जैसी कई अन्य गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। इन स्थितियों को मृत्यु का अंतर्निहित कारण नहीं माना जाता है क्योंकि ये सीधे तौर पर कोविड-19 के कारण मृत्यु का कारण नहीं बने हैं।
- आईसीएमआर की ओर से जारी की गई गाइडलाइंस सिर्फ सलाह है, अनिवार्य नहीं। इसका मतलब है कि इसे लागू करना राज्यों पर निर्भर है।
बता दें कि इस मामले में अगली सुनवाई 11 जून को होगी।