सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना लोक सेवा आयोग (टीजीपीएससी) की तरफ से कई सरकारी विभागों में 563 ग्रेड-I पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि इस तरह के आदेश से अराजकता पैदा होगी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, ये परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी है, अगर हम इस स्तर पर परीक्षा पर रोक लगाते हैं तो अराजकता फैल जाएगी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने ये बात तब कही, जब याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अंतरिम रोक लगाने का दबाव डाला। पीठ ने कहा, परीक्षा आज होनी है। छात्र पहले ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश कर चुके हैं। इस पर सिब्बल ने कहा कि अभ्यर्थी राज्य में पहली बार आयोजित की जा रही परीक्षा में बैठने का मौका खो देंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को सिर्फ एक उम्मीदवार होने पर इनमें से कोई नहीं (नोटा) विकल्प चुनने से रोकने वाले जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधान को चुनौती वाली याचिका पर केंद्र व निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई याचिका में अधिनियम की धारा 53 (2) को चुनौती दी गई है। अधिनियम की धारा 53 चुनाव लड़े गए और निर्विरोध चुनावों में प्रक्रिया से संबंधित है। वहीं धारा 53 (2) कहती है कि यदि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली सीटों की संख्या के बराबर है, तो रिटर्निंग अधिकारी तुरंत ऐसे सभी उम्मीदवारों को उन सीटों को भरने के लिए विधिवत निर्वाचित घोषित करेगा। पीठ ने याचिका पर केंद्र व चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता कानूनी थिंक टैंक विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी की ओर से वकील अरविंद दातार और अधिवक्ता हर्ष पाराशर पेश हुए।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के विभिन्न हाईकोर्ट के जजों की सोच पर चिंता जताते हुए कहा कि वे न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस पीके मिश्रा ने कहा, यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है और आश्चर्य जताया कि हाईकोर्ट के जजों पर शीर्ष अदालत का बहुत कम प्रभाव पड़ता है। उसके निर्णयों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है।
शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया था कि गुजरात हाईकोर्ट के जज ने 1 मार्च, 2023 को वकील की दलीलें सुनने के बाद आदेश नहीं सुनाया था और हाईकोर्ट के आईटी सेल ने एक साल बाद 30 अप्रैल, 2024 को याचिकाकर्ता को एक तर्कपूर्ण आदेश की सॉफ्ट कॉपी दी थी। पीठ ने कहा, गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में कानून का घोर उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट के जज काम का बोझ होने के बावजूद, विपरीत परिस्थितियों में सराहनीय प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं न्यायिक प्रणाली को बदनाम कर रही हैं और पूरी न्यायपालिका की छवि खराब कर रही हैं।