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Updates: किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जल्द समिति गठित करेगा सुप्रीम कोर्ट, दो सितंबर को अगली सुनवाई

Thu, 22 Aug 2024 06:55 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Updates: उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसे अंबाला के पास शंभू बार्डर पर लगाए गए अवरोधकों को एक सप्ताह के भीतर हटाने के लिए कहा गया था।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वह किसानों की शिकायतों का ‘हमेशा के लिए’ सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए जल्द ही एक बहु सदस्यीय समिति का गठन करेगा। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख मुकर्रर की। साथ ही पंजाब और हरियाणा की सरकारों से किसानों के मुद्दों की जानकारी समिति को देने को कहा।

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पंजाब सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि 12 अगस्त के आदेश का पालन करते हुए उसने प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बैठक की जिसमें वे अवरुद्ध राजमार्ग को आंशिक रूप से खोलने पर सहमत हो गए। पीठ ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों से कहा कि वे प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत करते रहें और उन्हें राजमार्ग से अपने ट्रैक्टर और ट्रॉलियां हटाने के लिए राजी करें। इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने 12 अगस्त को पंजाब सरकार से कहा था कि वह 13 फरवरी से शंभू बार्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को सड़क से ट्रैक्टर और ट्रॉलियां हटाने के लिए राजी करे। अदालत ने कहा था कि राजमार्ग पार्किंग स्थल नहीं हैं।



उच्चतम न्यायालय उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली हरियाणा सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उसे अंबाला के पास शंभू बार्डर पर लगाए गए अवरोधकों को एक सप्ताह के भीतर हटाने के लिए कहा गया था। इस स्थान पर प्रदर्शनकारी किसान 13 फरवरी से डेरा डाले हुए हैं। 
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सुप्रीम कोर्ट: सीतलवाड़ की मलेशिया यात्रा के लिए शर्तों में संशोधन
उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को एक सम्मेलन के लिए 31 अगस्त से 10 सितंबर तक मलेशिया की यात्रा करने की अनुमति देते हुए उन पर लगायी गई 10 लाख रुपये की मुचलका राशि जमा कराने की शर्त में संशोधन कर दिया।

न्यायालय ने 20 अगस्त को सीतलवाड को 11 दिनों के लिए मलेशिया के सेलंगोर की यात्रा करने की अनुमति दी थी। शीर्ष न्यायालय ने 2002 में गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर दस्तावेज तैयार करने के मामले में तीस्ता को पिछले वर्ष जुलाई में नियमित जमानत दे दी थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह शीर्ष न्यायालय के समक्ष एक वचनबद्धता दाखिल करेंगी कि वह निर्धारित समय पर भारत लौटेंगी और मुकदमे का सामना करेगी तथा अहमदाबाद की सत्र अदालत की संतुष्टि के लिए 10 लाख रुपये का मुचलका भी प्रस्तुत करेंगी। बृहस्पतिवार को सीतलवाड के वकील ने न्यायमूर्ति बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का जिक्र किया। पीठ में न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन भी शामिल थे। वकील ने पीठ से मुचलका उपलब्ध कराने की शर्त में संशोधन का अनुरोध करते हुए कहा कि इसमें काफी समय लगेगा।

पीठ ने संज्ञान लिया कि गुजरात सरकार की तरफ से पेश हो रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने सीतलवाड द्वारा जमानत शर्त में बदलाव के लिये किये गये अनुरोध का विरोध नहीं किया है। न्यायालय ने कहा कि विधि अधिकारी ने कहा है कि उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त शर्तें लगाई जानी चाहिए।

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