कर्नाटक हाईकोर्ट ने विप्रो के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल करने पर दो वकीलों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था और सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से दो वकीलों को सुनाई गई दो महीने जेल की सजा के आदेश को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने यह सजा विप्रो के पूर्व चेयरमैन अजीम प्रेमजी और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल करने के लिए अदालत की अवमानना के लिए सुनाई थी।
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अधिवक्ता आर सुब्रमण्यम और पी सदानंद ने 'इंडिया अवेक फॉर ट्रांसपैरेंसी' नामक एक निजी कंपनी के जरिए प्रेमजी के खिलाफ 70 से अधिक याचिकाएं दायर की थीं। हाईकोर्ट ने दोनों को 14 जनवरी को अदालत की अवमानना के मामले में दोषी करार दिया था और दो-दो महीने कारावास की सजा सुनाई थी।
न्यायाधीश एसके कौल और एमएम सुंदरेश की पीठ ने अधिवक्ता आर सुब्रमण्यम की इस दलील पर गौर किया कि वह दो सप्ताह के भीतर कर्नाटक हाई कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगेंगे। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रमण्यम के आचरण को देखने के लिए तीन साल के लिए उनकी सजा निलंबित कर दी।
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पीठ ने कहा, हमें हाईकोर्ट का फैसला तथ्य और कानून पर सही है और हमें उसके गुण-दोष पर जरा भी संदेह नहीं है। लेकिन, अपीलकर्ता ने हमें सफलतापूर्वक ये समझाने की कोशिश की है कि वह एक अलग राह पर चलना चाहता है और उस पहली पर हमने आपराधिक अपीव व संबंधित मामलों पर ध्यान दिया है।