सुप्रीम कोर्ट ने केदारनाथ में लगातार हो रहे हेलीकॉप्टर हादसों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र, डीजीसीए और उत्तराखंड सरकार से जवाब मांगा है। हाल ही में गौरीकुंड में हुए हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी। चारधाम यात्रा के दौरान यह पांचवां बड़ा हादसा था।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में खासकर केदारनाथ क्षेत्र में हो रहे हेलीकॉप्टर हादसों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और उत्तराखंड सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने यह नोटिस हादसों की श्रृंखला को देखते हुए जारी किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है।
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याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि केदारनाथ की ओर जाने वाले मार्ग पर हेलीकॉप्टर हादसों की संख्या बढ़ रही है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में 15 जून को गौरीकुंड के जंगलों में खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के कारण एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें पायलट, एक दो वर्षीय बच्ची समेत कुल सात लोगों की मौत हो गई थी। यह हादसा 30 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा के दौरान इस रूट पर पांचवां बड़ा हादसा था।
हादसों की लंबी लिस्ट
इससे पहले सात जून को केदारनाथ जा रहे एक हेलिकॉप्टर को उड़ान भरने के तुरंत बाद तकनीकी खराबी के कारण सड़क पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी थी, जिसमें पायलट घायल हो गया लेकिन पांचों यात्री सुरक्षित रहे। 12 मई को बद्रीनाथ से लौट रहा एक हेलिकॉप्टर ऊखीमठ में एक स्कूल के मैदान में आपात लैंडिंग करने को मजबूर हुआ, जबकि आठ मई को गंगोत्री धाम जा रहा हेलिकॉप्टर उत्तरकाशी जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें छह लोगों की मौत हुई।
सरकार की कार्रवाई और डीजीसीए की भूमिका
गौरीकुंड हादसे के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने चारधाम यात्रा के लिए संचालित करने वाली कंपनी के संचालन पर रोक लगा दी है। साथ ही डीजीसीए को आदेश दिया गया है कि वह केदारनाथ घाटी में हो रही सभी हेलिकॉप्टर गतिविधियों पर सक्रिय निगरानी रखे। मंत्रालय ने एयरवर्दीनेस, सुरक्षा और संचालन से जुड़े अधिकारियों को मौके पर तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की उम्मीदें और अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यात्रियों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अदालत ने उम्मीद जताई कि केंद्र और डीजीसीएइस मामले में ठोस कदम उठाएंगे और हादसों के कारणों की पारदर्शी जांच करेंगे। अब चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई में इन संस्थाओं को अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा।