सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जापान की ओर से वित्त पोषित बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद रेल परियोजना को लेकर ऋण विलेख समेत समझौतों की नियमों और शर्तों का उल्लंधन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को दरकिनार कर दिया जिसमें नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के संबंध में एक डिपो के निर्माण और विकास के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी मोंटेकार्लो लिमिटेड की बोली पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। न्यायाधीश एमआर शाह और एएस बोपन्ना की पीठ ने यह कहते हुए कि यह परियोजना 'राष्ट्रीय महत्व' की है, हाईकोर्ट के अगस्त 2021 के फैसले को रद्द कर दिया।
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एनएचएसआरसीएल ने मोंटेकार्लो की बोली को अस्वीकार कर दिया था और एससीसीवीआरएस-जेवी को ठेका दिया था। मोंटेकार्लो ने तब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मोंटेकार्लो ने अपनी याचिका में कहा था कि बोली को खारिज करते समय कोई कारण नहीं बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद रेल परियोजना को लेकर ऋण विलेख समेत समझौतों की नियमों-शर्तों का उल्लंघन करने की अनुमति किसी कंपनी और यहां तक कि भारत सरकार को भी नहीं दी जा सकती है।
बुलेट ट्रेन परियोजना जापान के साथ साझेदारी में 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। इस परियोजना के 2022 तक 1.10 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से पूरा होने की उम्मीद थी। यह बताया गया है कि परियोजना के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में लगभग 1400 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। लगभग 6000 भूमालिकों को मुआवजा देना होगा। 2019 में गुजरात हाईकोर्ट ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली किसानों और भूमालिकों द्वारा दायर विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया था।